
आगरा। ग्रामीण विकास संघर्ष समिति के तत्वाधान में शनिवार दहतोरा में कई गांवों के ग्रामीण एकत्र हुए। यहां से जुलूस के रूप में नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शास्त्रीपुरम पहुंचे, जहां उन्होंने नगर निगम का पुतला फूंका। ग्रामीण विकास संघर्ष समिति के संयोजक डॉ. सुनील राजपूत ने कहा कि जिन गांव का नगर निगम अपनी सीमा में विस्तार कर रहा है, उन गांव के लोगों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नगर निगम से अपने 100 वार्डों में विकास कार्य कराए नहीं जाते, फिर ग्रामीण अंचल के इन गांव का विकास कैसे होगा।
ये बोले ग्रामीण
ग्रामीणों ने कहा कि आए दिन पार्षदों व क्षेत्रीय जनता विकास कार्यों के लिए नगर निगम में धरना प्रदर्शन करती रहती है। वर्तमान में पार्षद भी सीमा विस्तार के हक में नहीं हैं। उसके बाद भी बिना ग्रामीणों की राय के इन गांव को नगर निगम में शामिल करना गैर संवैधानिक है। ग्रामीण विकास संघर्ष समिति के कार्यकर्ता जल्द मेयर व नगर आयुक्त से मिलकर ग्रामीणों की भावनाओं से अवगत करा कर नगर निगम सीमा विस्तार का विरोध दर्ज कराएंगे। सीमा विस्तार में आ रहे सभी गांव के ग्रामीणों से बात कर आगे की रणनीति तय करके आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। ज़रूरत पड़ी तो गाय भैंसों के साथ नगर निगम के घेराव से पीछे नहीं हटेंगे ग्रामीण। नगर निगम सीमा विस्तार से पहले ना गांव वालों को विकास का ख़ाका बताया, ना किस मद में कितना टेक्स लिया जाएगा ये बताया, ग्रामीणों को सीमा विस्तार से पहले ना विश्वास में लिया गया। सीमा विस्तार को लेकर ग्रामीणों में भय व रोष व्याप्त है।
उन गांव की पहले ही हालत बुरी
ग्रामीण विकास संघर्ष समिति के पवन चौधरी ने कहा कि सभी जानते हैं कि जो गाँव पिछले नगर निगम सीमा विस्तार में शामिल किये गए थे उनकी हालात बदतर है। ग्रामीण विकास संघर्ष समिति जितने भी गांव नगर निगम में शामिल किये जा रहे हैं, उनके साथ इस आंदोलन को धार देगी। उन्होंने कहा कि नगर निगम को पहले शहरी क्षेत्र का विकास करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम प्रधान और जिला पंचायत विकास करने के लिए काफी हैं। सरकार को नगर निगम का प्रस्ताव निरस्त कर देना चाहिए क्योंकि प्रशासन को कोई भी फैसला जिला पंचायत और सभी ग्रामवासियों से राय लेकर करना चाहिए।
गलत हुआ ये निर्णय
ग्रामीण विकास संघर्ष समिति के विष्णु मुखिया ने कहा कि मेयर, नगर निगम अधिकारियों और पार्षदों की एक कमेटी ने शहर की चारों दिशाओं में सीमा विस्तार के लिए निरीक्षण कर प्रस्ताव तैयार किए। उन्होंने कहा कि बिना ग्रामीणों कि राय लिए कोई भी व्यक्ति, नेता या अधिकारी कैसे तय कर सकता है कि किस गांव को नगर निगम में रखा जाए और किसे नहीं।ग्रामीणों का यह सविंधानिक हक़ है कि वह तय करें की उन्हें गाँव में रहना है या नगर निगम में। बिना गाँव वालों की मर्जी के उन्हें नगर निगम में शामिल करना उनके संवैधानिक हकों का हनन है।
गांव का असतित्व खतरे में
ग्रामीण विकास संघर्ष समिति के रजत लोधी ने कहा कि आज नगर निगम आगरा के ग्रामीण क्षेत्र का वर्चस्व ही खत्म करने पर तुला हुआ है। ग्रामीण विकास संघर्ष समिति जितने भी गाँव नगर निगम में शामिल किये जा रहे हैं, उनके साथ इस आंदोलन को धार देगी। उन्होंने कहा कि नगर निगम को पहले शहरी क्षेत्र का विकास करना चाहिए।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर जयपाल चौधरी, जीतू राजपूत, रजत लोधी, शिवा बघेल, अजय चैधरी, पवन लोधी, योगेश, रोहित शर्मा, रामबाबू, निनुआ खान, यषपाल सिंह, संतोष, थानसिंह, वीरेन्द्र राजपूत, गौरव राजपूत, सुनील लोधी, खेम सिंह, राहुल खान, सोनू राजपूत, मुकेश राजपूत, छोटू लोधी,, वीरेन्द्र राजपूत, हीरा लाल, साहब सिंह, सरोज सिंह, विजय सिंह लोधी, रोशन सिंह, हरिओम लोधी, गौरव राजपूत, यशपाल लोधी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।