पढ़ेे गोपाल दास 'नीरज' को किन गानों के लिए मिला फिल्म फेयर अवॉर्ड और कौन कौन से गाने लोग आज भी गुनगुनाते हैं।
आगरा। मशहूर गीतकार व महाकवि गोपाल दास नीरज का 19 जुलाई की रात में लंबी बीमारी के चलते 93 साल की उम्र में निधन हो गया। उनका पूरा नाम गोपालदास सक्सेना 'नीरज' था। मूलरूप से वे अलीगढ़ के रहने वाले थे, लेकिन आगरा से ताउम्र उनका खास जुड़ाव रहा। गोपाल दास नीरज सिर्फ एक कवि और साहित्यकार ही नहीं थे, बल्कि हिंदी फिल्मों के बेहतरीन गीतकार भी थे। जानते हैं उनकी कुछ प्रसिद्ध रचनाओं के बारे में।
हिंदी फिल्मों के ये गाने हुए अमर
'पहचान' फिल्म का गीत 'बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं', फिल्म चंदा और बिजली का 'काल का पहिया घूमे रे भइया' और फिल्म 'मेरा नाम जोकर' का 'ए भाई! ज़रा देख के चलो' ऐसे गीत हैं जो लोगों के जेहन में आज भी जिंदा हैं। इन गीतों ने नीरज को कामयाबी की बुलंदियों पर पहुंचाया। इन गानों के लिए उन्हें लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा 'शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब' 'लिखे जो खत तुझे' 'दिल आज शायर है, ग़म आज नगमा है' 'आज मदहोश हुआ जाए' और 'कारवां गुज़र गया गुब्बार देखते रहे' जैसे गाने आज भी लोग गुनगुनाते मिल जाते हैं।
इन दोहों में छिपा जिंदगी का सार
1. मित्रो हर पल को जियो अंतिम पल ही मान
अंतिम पल है कौन सा, कौन सका है जान
2. रुके नहीं कोई यहां नामी हो कि अनाम,
कोई जाए सुबह को, कोई जाए शाम...
3. कुछ सपनों के मर जाने से
जीवन नहीं मरा करता है..
4. न जन्म कुछ न मृत्यु कुछ महज इतनी बात है
किसी की आंख खुल गई किसी को नींद आ गई...
5. जब तक डोरी हाथ में देख हवा का ढंग
पता नहीं किस पल कटे, किसकी तनी पतंग...
6. श्वेत श्याम दो रंग के चूहे हैं दिन रात
तन की चादर कुदरते पल पल रहकर साथ...
7. जो आए ठहरे यहां थे न यहां के लोग
सबका यहां प्रवास है, नदी नाव संजोग...
8. सिर्फ बिछुड़ने के लिए हैं ये मेल मिलाप,
एक मुसाफिर हम यहां, एक मुसाफिर आप...
9. जाने कब आखिरी खत आपके नाम आ जाए
आपसे जितना बने प्यार लुटाते रहिए...