स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिम्मनलाल जैन के बिस्तर के पास ही खादी का एक झोला टँगा रहता है।
आगरा। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिम्मनलाल जैन के बिस्तर के पास ही खादी का एक झोला टँगा रहता है। हमने बातचीत के दौरान पूछा कि आपके इस थैले में क्या है। इस पर उन्होंने थैला उठाया और कहा- इसमें पेंशन के कागज हैं। फिर उन्होंने थैले से टोपियां निकालनी शुरू करदीं। टोपियों पर लिखा है- हमारे देश की पहचान- हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान। एक टोपी पर लिखा है- देश बचाओ- शराब हटाओ।
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भारत का नाम भारत रहे, इंडिया नहीं
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मैना गेट (बेलनगंज, आगरा) पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिम्मनलाल जैन से पत्रिका की लम्बी बातचीत हुई। वे चाहते हैं कि भारत का नाम भारत रहे, इंडिया नहीं। उन्होंने इसके लिए अभियान भी चलाया था, लेकिन सफलता नहीं मिली। हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान के लिए भी अभियान चलाए हुए हैं। अब शारीरिक रूप से खुद नहीं जा सकते हैं, लेकिन जो भी मिलने आता है, उससे इन विषयों पर चर्चा जरूर करते हैं। यही उनकी जिन्दादिली का राज है।
सबसे अलग
स्वंतत्रता संग्राम सेनानियों के बलबूते हमने 15 अगस्त, 1947 को आजादी पाई। आजादी के आंदोलन में जेल जाने वाले अधिकांश सेनानी गुम हो गए हैं। वे प्रायः स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर प्रकट होते हैं। इसके विपरीत हैं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिम्मनलाल जैन। आजादी के बाद वे समाज सेवा में लग गए। शराब बंदी का अभियान चलाया लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।