सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज के चमरोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पीके सिंह चर्म रोग विभाग में आने वाला हर तीसरा मरीज फंगल संक्रमण का शिकार है।
आगरा। बारिश के साथ ही चर्म रोगों ने हमला बोल दिया है। हाल इतना बुरा है कि चर्म रोग विभाग में आने वाला हर तीसरा मरीज फंगल संक्रमण का शिकार है। खुजली से बुरा हाल है। खुजाने से घाव हो रहे हैं। कोई लोशन काम नहीं कर रहा है। ताजमहल के कारण दुनियाभर में प्रसिद्ध स्मार्ट सिटी आगरा में आखिर यह समस्या इतनी विकराल क्यों हो गई है? कोई घरेलू उपचार है इसका या नहीं? चिकित्सक लाचार क्यों हो रहे हैं? इस मुद्दे पर हमने बातचीत की सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज के चमरोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पीके सिंह से। आवास विकास कॉलोनी स्थित अपने निवास पर उन्होंने पत्रिका के हर सवाल का जवाब खुलकर दिया। प्रस्तुत हैं मुख्य अंश।
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पत्रिकाः बारिश के मौसम में त्वचा रोगों की क्या स्थिति है?
डॉ. पीके सिंहः इस समय सबसे बडी समस्या फंगल इन्फेक्शन की है। हर तीसरा मरीज फंगल इन्फेक्शन का है। इस हम साधारण भाषा में दाद कहते हैं। यह फफूंद के कारण होता है। पहले यह सामान्य रूप से बरसात के समय़ होता था। इस समय बारहो महीने चल रहा है। दवा नाकाम हो गई हैं। दवा का असर कम हो गया है। दवाइंया डबल डोज में लिखनी पड़ रही हैं। इस कारण थोड़ी सी समस्या है।
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पत्रिकाः इसका कारण क्या है कि फंगल इन्फेक्शन 12 महीने हो गया है।
डॉ. पीके सिंहः अभी कोई स्पष्ट कारण तो पता नहीं है। ऐसी संभावना है कि एंटी फंगल दवाइयां बहुत अधिक प्रयोग की गई हैं, सो दवाओं का असर कम हो गया है। दवारोधी हो गया है संक्रमण। पूरी शरीर में फैल रहा है। जहां नहीं होता था, वहां भी हो रहा है।
पत्रिकाः इसका कोई घरेलू उपचार है क्या?
डॉ. पीके सिंहः कोई घरेलू उपचार तो नहीं है, लेकिन सावधानी बरती जा सकती है। तेल न लगाएं। दोनों समय नहाएं। कपडे उतारकर नहाएं। हमारे यहां आदत क्या है कि कपड़े पहनकर नहाते हैं, जिससे सफाई ठीक से नहीं हो पाती है। एक ही तौलिया घर के कई लोग प्रयोग कर रहे हैं तो समस्या है। कपड़े अलग हों। जब भी नहाएं साबुन से नहाएं। हमारे यहां साबुन का प्रयोग कम करते हैं। सफाई रहेगी तो थोड़ी सी समस्या कम रहेगी।
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पत्रिकाः एक समय था जब एक ही तौलिया से पूरा परिवार नहा लिया करता था, अब आप कह रहे हैं कि सब तौलिया अलग-अलग रखें, पहले यह समस्या नहीं थी?
डॉ. पीके सिंहः पिछले दो-तीन साल से समस्या अधिक हो गई है। डॉक्टरों के लिए भी चुनौती हो गई है। कौन सी दवा काम करेगी, कौन सी नहीं।
पत्रिकाः क्या त्वचा रोग महिला और पुरुषों में अंतर करता है?
डॉ. पीके सिंहः पहले हुआ करता था अंतर। महिलाओं को अंडर गारमेंट में कम और पुरुषों में अधिक होता था। आजकल सभी को एक जैसा होने लगा है। पहले पढ़ाते थे कि सर में फंगल संक्रमण नहीं होता है, लेकिन अब हो रहा है।
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पत्रिकाः ये समस्या क्या खान-पान में बदलाव के कारण है या पर्यावरण के काऱण।
डॉ. पीके सिंहः इस पर शोध चल रहा है। अभी तक कुछ भी निकलकर नहीं आया है कि किस कारण से हो रहा है। फंगल में बदलाव है या दवाइयों में बदलाव है। शोध के परिणाम की प्रतीक्षा हम चिकित्सकों को है।
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