आगरा

Hartalika Teej 2018 Puja Muhurat : पूजन को मिलेगा सिर्फ इन दो घंटों का समय, पार्वती ने भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए किया था हरतालिका तीज व्रत

गणेश चतुर्थी से पहले Hartalika Teej , शिव पार्वती की ऐसे पूजा कर पति की लंबी उम्र पाएं, भाद्रपद के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पर्व
2 min read
• •
Updated: 12 Sep 2018, 4:09 PM IST
hartalika teej
24 August 2017

आगरा। भाद्रपद के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को hartalika teej मनाई जाती है। वैदिक हिन्दू धर्म के त्योहारों व शास्त्रों में तिथियों का महत्व है। वैदिक सूत्रम चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि भाद्रपद के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाती है। Ganesh Chaturthi तिथि के एक दिन पहले हरतालिका तीज मनाई जाती है। इस वर्ष हरतालिका तीज 12 सितंबर 2018 को मनाई जाएगी। वहीं गणेश चतुर्थी 13 सितंबर को मनाई जाएगी।

करवा चौथ की तरह सुहागिनों का व्रत
वैदिक सूत्रम चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि हरियाली तीज, कजरी तीज और करवा चौथ की तरह ही हरतालिका तीज भी सुहागिनों का व्रत होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और भगवान शिव और पार्वती से सदा सुहागन का आशीर्वाद मांगती हैं। इस व्रत को निराहार और निर्जला रखा जाता है। वैदिक हिन्दू शास्त्रों में मान्यता है कि इस व्रत को सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए किया था। इसलिए यह कहा जाता है कि माता पार्वती की तरह अच्छा वर प्राप्त करने के लिए कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत को रख सकती हैं।

हरतालिका तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त
पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि इस बार Hartalika Teej 12 सितंबर 2018 को मनाई जाएगी। इस बार प्रात: काल पूजन के लिए महिलाओं को सिर्फ 2 घंटे 29 मिनट का समय मिलेगा। प्रात:काल मुहूर्त सुबह 6 बजकर 4 मिनट से लेकर 8 बजकर 33 मिनट तक है। वैदिक सूत्रम चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम ने हरतालिका तीज का महत्व बताते हुए कहा कि वैदिक हिन्दू शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को पहली बार मां पार्वती ने भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए किया था। मां पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए अन्न और जल सभी का त्याग कर दिया था। उनके पिता की इच्छा थी कि पार्वती भगवान विष्णु से शादी कर लें। लेकिन, मां पार्वती के मन मंदिर में भगवान शिव बस चुके थे और इसलिए उन्होंने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और कठोर तपस्या शुरू कर दी। इस दौरान मां पार्वती ना तो कोई अन्न ग्रहण किया और ना ही जल ही ग्रहण किया। इसलिए यह माना जाता है कि इस व्रत में अन्न जल ग्रहण नहीं करना चाहिए। मां पार्वती की कठोर तपस्या को देखकर भगवान शंकर उनके सामने प्रकट हुए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

Updated on:
12 Sep 2018, 4:09 PM IST
Published on:
Also Read
View All
पति की मौत पर पत्नी बोली- अधिकारी प्रताड़ित करते थे, कहते थे तुम्हारी जिंदगी बर्बाद कर देंगे

‘भाजपा किसी की सगी नहीं’ MLC चुनाव में बवाल, सपा नेता ने BJP प्रत्याशियों पर आकाश अग्रवाल पर जानलेवा हमले का लगाया आरोप

UP MLC Election 2026: ‘पश्चिम बंगाल जैसी गुंडई यूपी में भी’, सपा प्रत्याशी बोले- 12 जिलों में आपातकाल से भी बदतर हालात’

ताजमहल की खूबसूरती के साथ भारतीय संस्कृति के रंग में रंगे विदेशी पर्यटक, बोलीं फ्रांस की अलेक्जेंड्रा- भारत में सुरक्षित महसूस हो रहा

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आवास पर प्रदर्शन के आरोपी कांग्रेस नेता रिहा, जेल से निकलते ही निकाला जुलूस, पुलिस से हुई तीखी नोकझोंक