आगरा

विदेशियों से 20 साल पहले हो रहे भारत में हार्ट फेल्योर, जानिए क्या है कारण

भारत में विदेशियों से 20 साल पहले हार्ट फेल्योर और कार्डियो वेस्कुलर डिजीज देखने को मिल रहे हैं, इसका सही तरह से मैनेजमेंट न होने से मौत हो रही हैं।

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Jun 29, 2018
Heart disease experts

आगरा। दुनिया के ह्रदय रोगियों में 16 फीसद भारतीय हैं, इसमें भी भारत में विदेशियों से 20 साल पहले हार्ट फेल्योर और कार्डियो वेस्कुलर डिजीज देखने को मिल रहे हैं। इसका सही तरह से मैनेजमेंट न होने से मौत हो रही हैं। यहां तक कि इलाज के बाद हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने पर 26 फीसद मरीजों की मौत रिपोर्ट की जा रही है। जबकि विदेशों में यह नौ फीसद है। आगरा के होटल क्लार्क शिराज में पहले हार्ट फेल्योर कॉन्क्लेव में देश हे विभिन्न प्रांतों के 100 ह्रदय रोग विशेषज्ञों ने हार्ट फेल्योर और सीवीडी के बढ़ते कारण और मैनेजमेंट पर चर्चा की।

ये दी महत्वपूर्ण जानकारी
डॉ सुवीर गुप्ता ने बताया कि कुछ दवाएं हैं, जिनसे कार्डियो वेस्कुलर डेथ 20 फीसद तक कम हो सकती हैं, उन्होंने अलग अलग दवाओं और ह्रदय रोगियों में उनके रिजल्ट पर चर्चा की। बताया कि 2020 तक भारत में कार्डियो वेस्कुलर डिजीज से होने वाली मौत चिंता का विषय होगी। इसकी रोकथाम संभव है। हार्ट फेल्योर भारत में 53 साल की उम्र में देखने को मिल रहा है। अमेरिका सहित कई देशों में हार्ट फेल्योर के केस 73 साल की उम्र पर रिपोर्ट हो रहे हैं। यही उम्र व्यक्ति की कमाने की होती है। इस दौरान उसे बीमारी हो जाए तो पूरा परिवार बिखर जाता है। इससे बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर का मैनेजमेंट भी जरूरी है।

ये बोले चिकित्सक
ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ईशान गुप्ता ने हार्ट फेल्योर के मैनेजमेंट में नई और पुरानी दवाओं पर स्टडी पेश की। ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक अग्रवाल ने हार्ट फेल्यर और सीवीडी के केस में डिफिबिलेटर सहित अन्य उपकरणों के इस्तेमाल पर चर्चा की। ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. वीनेश जैन ने बताया कि करीब 50 फीसद हार्ट फेल्योर और सीवीडी के मरीज में कोई लक्षण नहीं होते हैं, उन्हें चेस्ट पेन की भी शिकायत नहीं होती है। ऐसे केस के मैनेजमेंट पर चर्चा की। ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु यादव ने एक्यूट हार्ट फेल्योर के डायग्नोज और मैनेजमेंट पर चर्चा की। ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज कुमार ने एडवांस हार्ट फेल्योर पर रिपोर्ट पेश की। ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश गोयल ने हार्ट फेल्योर के मैनेजमेंट पर जानकारी दी।

इन्होंने किया शुभारम्भ
हार्ट फेल्योर कॉन्क्लेव का शुभारंभ एसएन के पूर्व प्राचार्य ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ वीके जैन और प्राचार्य डॉ जीके अनेजा व मेदान्ता हॉस्पीटल गुड़गांव के डॉ गगनदीप सिंह, डॉ. अजय अग्रवाल ने किया। इस दौरान मुख्य रूप से डॉ. दीपक अग्रवाल, डॉ. मनीष शर्मा, डॉ. जय कुमार अग्रवाल, डॉ. जितेन्द्र सिंह, डॉ. विनीत गर्ग, डॉ. सुमित अग्रवाल, डॉ. प्रवेग गोयल, डॉ. हिमांशु यादव आदि उपस्थित थे।

पांच वर्षों में 3-5 मिलियन भारतीयों को हार्ट फेल्योर की सम्भावना
कार्डियोवेस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जन डॉ. आदर्श कोपुला ने बताया कि अंदाजन भारत में लगभग 3-5 मिलियन लोगों को हार्ट फेल्योर डाइग्नोज किया गया है। ऐसे लोगों में लगभग 50 फीसदी का जीवन लगभग 5 वर्ष तक ही हो सकता है। भारत में हार्ट फेल्योर के मुख्य कारण कॉरनरी आर्टरी डिजीज, वॉल्व्यूलर हार्ट डिजीज और डायबिटीज है। हार्ट फेल्योर में हॉर्ट ट्रांसप्लांट मददगार हो सकता है लेकिन भारत में अंगदान का प्रतिशत मात्र .05 और यूरोपियन देशों में 1.5 है।

Updated on:
29 Jun 2018 02:41 pm
Published on:
29 Jun 2018 10:21 am
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