आगरा में भद्रा पूंछ- 16:00 से 17:05 और भद्रा मुख- 17:09 से 18:56 का समय रहेगा। इसलिए होलिका दहन के लिए 19:40 के बाद का समय शुभ बेला में होलिका-दहन
आगरा। होली एक मार्च को है। आगरा के अपने पाठकों के लिए शुभ मुहुर्त के लिए पत्रिका टीम ने बात की भविष्यवक्ता और पंडित प्रमोद गौतम से उन्होंने बताया कि 1 मार्च 2018 को भद्रा पूंछ-16:00 से 17:05 और भद्रा मुख- 17:09 से 18:56 का समय रहेगा। इसलिए होलिका दहन के लिए 19:40 के बाद का समय शुभ बेला में होलिका-दहन किया जा सकता है। 1 मार्च को ही होलिका दहन करना वैदिक शास्त्रसम्मत होगा।
किस तरह करें होली का पूजन
उनका कहना है कि भद्रा के मुख का त्याग करके निशा मुख में होली का पूजन करना शुभफलदायक सिद्ध होता है। वैदिक हिन्दू ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी पर्व-त्योहारों को मुहूर्त शुद्धि के अनुसार मनाना शुभ एवं कल्याणकारी है। वैदिक हिंदू धर्म में अनगिनत मान्यताएं, परंपराएं और रीतियां हैं। वैसे तो समय परिवर्तन के साथ-साथ लोगों के विचार व धारणाएं बदलीं, उनके सोचने-समझने का तरीका बदला, लेकिन वैदिक हिन्दू संस्कृति का आधार अपनी जगह आज भी कायम है।
घर में होली की अग्नि होती है प्रज्जवलित
सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होलिका में अग्नि प्रज्जवलित कर दी जाती है। सार्वजनिक होली से अग्नि लाकर घर में बनाई गई होली में अग्नि प्रज्जवलित की जाती है। सेक कर लाये गये धान्यों को खाने से निरोगी रहने की मान्यता है।
इन चीजों की दें आहुति
होलिका दहन होने के बाद होलिका में जिन वस्तुओं की आहुति दी जाती है, उसमें कच्चे आम, नारियल, भुट्टे या सप्तधान्य, चीनी के बने खिलौने, नई फसल का कुछ भाग है। सप्त धान्य है, गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर।
होलिका दहन की पूजा विधि
होलिका दहन करने से पहले होली की पूजा की जाती है। इस पूजा को करते समय, पूजा करने वाले व्यक्ति को होलिका के पास जाकर पूर्व या उतर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। पूजा करने के लिये निम्न सामग्री को प्रयोग करना चाहिए। एक लोटा जल, माला, रोली, चावल, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल आदि का प्रयोग करना चाहिए। इसके अतिरिक्त नई फसल के धान्यों जैसे-पके चने की बालियां व गेहूं की बालियां भी सामग्री के रूप में रखी जाती है। इसके बाद होलिका के पास गोबर से बनी ढाल और अन्य खिलौने रख दिये जाते है।