आगरा

इस विधि से बच्चेदानी से जुड़ी हर समस्या का बिना ऑपरेशन निदान

रेनबो हॉस्पिटल में कई राज्यों के स्त्री रोग विशेषज्ञों को किया गया प्रशिक्षित

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Feb 19, 2019
Hysteroscopy

आगरा। रेनबो हॉस्पिटल में हिस्टेरोस्कोपी पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। डायग्नोस्टिक हिस्टेरोस्कोपी क्या है, यह कैसे की जाती है, ऑपरेटिव हिस्टेरोस्कोपी क्या है, यदि गर्भाशय में सेप्टम है तो क्या किया जा सकता है, गर्भाशय में फाइब्रॉयड या पॉलिप है तो क्या करना है, यदि कोई असामान्यता नहीं है व अत्यधिक रक्तस्त्राव है तो क्या हो सकता है, किन परिस्थितियों में डॉक्टर को दिखाना आवश्यक होता है? इन सभी सवालों के जवाब जानने का अवसर डॉक्टरों और स्टाफ को प्राप्त हुआ।

बच्चेदानी की बीमारियों की पहचान
दुनिया के जाने-माने चिकित्सक डॉ. ओसामा शाओकी (इजिप्ट) ने कई गायनेकोलॉजिस्ट को हिस्टेरोस्कोपी की ट्रेनिंग दी। डॉ. ओसामा ने बताया कि हिस्टेरोस्कोपी एक तरह से इंडोस्कोपी प्रणाली है। यह बच्चेदानी की बीमारियों की पहचान और निदान में इस्तेमाल होती है। उन्होंने बताया कि अभी आईवीएफ यानि टेस्ट ट्यूब बेबी प्रणाली में इसका इस्तेमाल अधिक होता है लेकिन मुख्य रूप से इस तकनीक से बच्चेदानी से जुड़ी हर समस्या का बिना ऑपरेशन निदान किया जा सकता है। जैसे यूटेरस फायब्रायड, बच्चेदानी के अंदर बनने वाली झिल्ली को हटाने में, फैलोपिन ट्यूब से जुड़ी वैसी समस्याओं को दूर करने में इस प्रणाली का इस्तेमाल किया जा सकता है।

बांझपन की वजह
रेनबो हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि कार्यशाला में बांझपन से जुडी विभिन्न समस्याओं पर लाइव ऑपरेटिंग प्रोसीजर, साइंटिफिक लेक्चर व डमी के जरिए प्रशिक्षण दिया गया। फोग्सी कीं पूर्व अध्यक्ष डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने बताया कि बांझपन की कई वजह सामने आ रही हैं। इनमें नली बंद होना, बच्चेदानी की गांठ या ट्यूमर, रसौली व एंडोमेट्रियोसिस, पेल्विक टीबी प्रमुख हैं। डॉ बिजॉय नायक ने बताया कि उचित इलाज के अभाव में तमाम दंपति निःसंतान रह जाते हैं। ऐसे दंपतियों के लिए गाइनी लेप्रोस्कोपी सर्जरी व हिस्टेरोस्कोपी वरदान से कम नहीं है।

कई राज्यों से आए चिकित्सक
डॉ. निहारिका एम बोरा और डॉ. मनप्रीत शर्मा ने बताया कि वर्कशॉप का उद्देश्य सभी गायनेकोलॉजिस्ट को आमंत्रित कर विशेषज्ञों के माध्यम से नई तकनीकों के बारे में बताना रहा। वर्कशॉप में लखनऊ, दिल्ली, अलीगढ़, ओडिसा, कोटा आदि जगहों से डॉक्टर शामिल हुए। इस दौरान डॉ. ऋषभ बोरा, डॉ. केशव मल्होत्रा, डॉ. शैमी बंसल, डॉ. नीलम माहेश्वरी, डॉ. दीक्षा गोस्वामी, डॉ. शैली गुप्ता, डॉ. सरिता दीक्षित आदि मौजूद थे।

Published on:
19 Feb 2019 05:32 pm
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