
आगरा। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस को लेकर अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा महिला प्रकोष्ठ के तत्वावधान में लोपामुद्रा पूर्व माध्यमिक विद्यालय में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय की छात्राओं ने स्वतन्त्रता दिवस पर आधारित कविताओं के माध्यम से आजादी के नायकों को नमन किया। कार्यक्रम में ‘महिला जागरूकता’ एवं ‘नारी सुरक्षा’ पर चर्चा-परिचर्चा हुई।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारम्भ
मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर मुख्य अतिथि डॉ. एसए पाटिल, डॉ. राजकुमारी शर्मा, सरोज गौड़, डॉ. मधु भारद्वाज, आचार्य देवेन्द्र स्वरूप शास्त्री एवं डॉ. बीनू जोशी द्वारा किया गया। छात्र छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। लोपामुद्रा पूर्व माध्यमिक विद्यालय के इतिहास की जानकारी नरोत्तम सिंह सिकरवार ने दी। उन्होंने कहा कि आज भी विद्यालय में 350 छात्र, छात्राएं अध्ययनरत हैं।
ये दी गई जानकारी
कार्यक्रम में ‘महिला जागरूकता’ एवं ‘नारी सुरक्षा’ पर चर्चा-परिचर्चा हुई। छात्राओं को महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के प्रति सजग किया गया और उन्हें सुरक्षा के टिप्स दिए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय जालमा कुष्ठ एवं अन्य माइकोवैक्टीरियल रोग संस्थान के निदेशक डॉ. एसए पाटिल ने कहा कि परिवार में मां का स्थान सर्वोपरि है। परिश्रम से ही आगे बढ़ सकते हैं। झांसी की रानी, कल्पना चावला, बछेन्द्री पाल का उदाहरण उत्कृष्ट है। डॉ. राजकुमारी शर्मा ने विद्यालय के अनुशासन की प्रशंसा करते हुए कहा, सही मायने में समाज की सुरक्षा की नींव विद्यालयों द्वारा ही डाली जाती है। जिलाध्यक्ष डॉ. मधु भारद्वाज ने कहा स्त्री-पुरुष समाज में एक साथ रहते हैं। एक-दूसरे का सम्मान करना आवश्यक है। नारी सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल नारी का ही नहीं, पूरे समाज का कार्य है। महिलाओं को अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों पर भी ध्यान देना होगा और स्वयं की रक्षा करना सीखना होगा, तभी उसे सही मायनों में आजादी मिलेगी- नारी की सुरक्षा है जरूरी, तभी मिलेगी आजादी पूरी।
ये बोले विशिष्ट अतिथि
विशिष्ट अतिथि आचार्य देवेन्द्र स्वरूप शास्त्री ने कहा दुनिया में सबका व्यवहार अलग होता है। हम सभी को अपनी दिनचर्या सुव्यवस्थित करनी चाहिए। भावना वरदान शर्मा ने कहा छात्राओं का प्रथम उद्देश्य अपनी पढ़ाई पूरी करना होना चाहिए और छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए। पंकजा शर्मा पाराशर ने कहा छात्राओं को अच्छे और बुरे स्पर्श की पहचान होना बहुत जरूरी है। सुनीता सारस्वत ने कहा छात्राएं किसी के बहकावे में न आएं और एकान्त से बचें।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर डॉ. केके मोहंती, सुनीता झा, डॉ. दीपा बिष्ट, अनिल चोपड़ा, कम्मो मसीह, नीतू किच्ची आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।