आगरा

अब आगरा में कीजिए भगवान खाटू श्याम के दर्शन, जानिए कौन हैं भगवान खाटू श्याम

जानिए खाटू श्याम भगवान कौन हैं? उनकी मान्यता, सच्ची कहानी और आगरा में बने खाटू श्याम मंदिर की विशेषताएं।

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Feb 21, 2018
khatushyam

राजस्थान में स्थित भगवान खाटू श्याम का मंदिर पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों के लोग वहां भगवान के दर्शन के लिए जाते हैं। लेकिन अब दर्शन के लिए यूपी वालों को राजस्थान जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि आगरा की जीवनी मंडी में भगवान खाटू श्याम का भव्य मंदिर 21 फरवरी से आम लोगों के लिए खुल गया है। राजस्थानी शैली में बने इस मंदिर की विशेषताएं जानने से पहले ये जानना जरूरी है कि आखिर भगवान खाटू श्याम कौन हैं?

कृष्ण के अवतार नहीं हैं खाटू श्याम

ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र बताते हैं कि श्याम शब्द जुड़ा होने के कारण लोग भगवान खाटू श्याम को कृष्ण भगवान का अवतार मानते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। खाटू श्याम गदाधारी भीम के पुत्र घटोत्कच्छ और नाग कन्या मौरवी के पुत्र हैं। उन्हें राजा बर्बरीक नाम से जाना जाता था। अत्यंत बलशाली बर्बरीक ने महाभारत के दौरान कमजोर पक्ष का साथ देने का अपनी मां को वचन दिया था। भगवान श्री कृष्ण जानते थे कि यदि राजा बर्बरीक कौरवों की तरफ चले गए तो पांडव हार जाएंगे। लिहाजा उन्होंने ब्राह्मण का भेष धारण कर राजा बर्बरीक से दान में उनका शीश मांग लिया था।

प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने दिया वरदान
दान में शीश मांगने पर बर्बरीक समझ गए कि ये साधारण ब्राह्मण नहीं बल्कि कोई और है। उन्होंने ब्राह्मण से असली रूप में आने के लिए कहा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें दर्शन दिए। इसके बाद राजा बर्बरीक ने खुशी खुशी अपना शीश दान कर दिया। राजा बर्बरीक के महान बलिदान से भगवान कृष्ण काफ़ी प्रसन्न हुए और उन्हें वरदान दिया कि जैसे-जैसे कलियुग का अवतरण होगा, तुम श्याम के नाम से पूजे जाओगे। तुम्हारे भक्तों का केवल तुम्हारे नाम का सच्चे दिल से उच्चारण मात्र से ही उद्धार होगा। यदि वे तुम्हारी सच्चे मन और प्रेम-भाव से पूजा करेंगे तो उनकी सभी मनोकामना पूर्ण होगी और सभी कार्य सफ़ल होंगे।

300 कारीगरों ने बनाया आगरा का मंदिर
आगरा में खाटू श्याम महाराज का विशाल मंदिर 21 फरवरी से आम लोगों के लिए खुल गया है। करीब छह वर्ष में तैयार इस मंदिर को 300 कारीगरों ने मिलकर बनाया है। 1200 गज में बने तीन फ्लोर के इस मंदिर की नक्काशी राजस्थानी शैली में की गई है। इसे वृंदावन के प्रेम मंदिर के शिल्पकारों ने तैयार किया है।

Published on:
21 Feb 2018 12:23 pm
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