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फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाले बाबा का आर्मी कराएगी इलाज, बोले थे- मैं NDA में बच्चों को पढ़ाता था

English Speaking Baba : आगरा के 80 वर्षीय संतोष गोयल, जो फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं और NDA में पढ़ाने का दावा करते हैं, उनकी मदद के लिए भारतीय सेना आगे आई है। सेना की टीम उन्हें आंखों के इलाज के लिए कमांड अस्पताल ले गई है।

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फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाले अशोक गोयल को लेकर गई आर्मी, PC- Patrika

आगरा: यह कहानी एक ऐसे शख्स की है जो कभी देश के भावी सैन्य अफसरों को अंग्रेजी के गुर सिखाता था, लेकिन वक्त की मार ने उसे आगरा की धूल भरी गलियों में गुमनाम कर दिया। 80 वर्षीय संतोष गोयल, जिन्हें लोग सिर्फ एक साधारण 'मैले-कुचैले बाबा' समझते थे, आज अपनी फर्राटेदार अंग्रेजी और सेना से जुड़े दावों के कारण सुर्ख़ियों में हैं।

मंगलवार को भारतीय सेना के जवान उन्हें सम्मान के साथ अपने साथ कमांड अस्पताल ले गए, जहां अब उनकी खोई हुई आंखों की रोशनी लौटाने की कोशिश की जाएगी।

एक वायरल वीडियो ने बदल दी किस्मत

संतोष गोयल की जिंदगी तब बदली जब जीएसटी के एडिशनल कमिश्नर अजय मिश्रा ने उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में फटे-पुराने कपड़ों में दिख रहे इस बुजुर्ग ने जब शुद्ध और फर्राटेदार अंग्रेजी में अपनी व्यथा सुनाई, तो हर कोई दंग रह गया।

जान लें संतोष गोयल ने वीडियो में क्या किए दावे

पीएचडी होल्डर : उन्होंने दावा किया कि वे 1971 में अंग्रेजी में पीएचडी कर चुके हैं।
NDA में शिक्षक : उन्होंने पुणे के नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में करीब 3 साल तक कैडेट्स को पढ़ाया है।
सेना से नाता : संतोष के अनुसार, उनके पढ़ाए छात्र आज सेना में मेजर से लेकर जनरल तक के पदों पर देश की सेवा कर रहे हैं।
अंधेरे ने छीनी नौकरी : उन्होंने बताया कि आंखों की रोशनी जाने के कारण उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया, वरना आज वे 80 हजार रुपए महीने की पेंशन पा रहे होते।

ढोकले और लड्डू से भरता था पेट

संतोष गोयल की हालत इतनी दयनीय थी कि दांत न होने के कारण वे रोटी तक नहीं खा पाते थे। वे पास के ही एक मिष्ठान भंडार से मिलने वाले भोग (ढोकले और लड्डू) खाकर अपना गुजारा करते थे। न्यू आगरा के नगला पदी में एक छोटी सी गली के आखिरी घर में वे रहते थे, जहाँ रहने वाले लोग भी उनसे कोई रिश्ता होने से इनकार करते हैं।

पड़ोसी बोले- हमने कभी वर्दी पहने नहीं देखा

जहां एक तरफ सेना उनकी मदद के लिए आगे आई है, वहीं पड़ोसियों के मन में कई सवाल हैं:
गुमनामी के 15 साल : पड़ोसियों का कहना है कि उन्होंने बाबा को कभी फौज की वर्दी में या नौकरी पर जाते नहीं देखा।
भिक्षा का सहारा : कुछ लोगों के अनुसार, वे शाह मार्केट के पास लोगों से मदद मांगकर अपना खर्च चलाते थे।
पढ़े-लिखे पर रहस्यमयी : लोग मानते हैं कि वे शिक्षित तो हैं, लेकिन उनके NDA वाले दावों की सच्चाई पर उन्हें यकीन नहीं है।

भारतीय सेना अब न केवल संतोष गोयल की आंखों का इलाज करा रही है, बल्कि उनके दावों की पुष्टि के लिए पूछताछ भी कर रही है। अगर उनके दावों में सच्चाई पाई गई, तो यह एक गुरु के लिए सेना का सबसे बड़ा सम्मान होगा। फिलहाल, आगरा के लोग उस बुजुर्ग के लिए दुआ कर रहे हैं जिसकी आंखों में अब अंधेरे के बाद उम्मीद की एक नई किरण जगी है।