डॉ. सुनील बंसल ने बताया कि 45 साल की उम्र में महिलाओं में मीनोपॉज होता है
आगरा। अभी तक मधुमेह की दवाओं से शरीर में सोडियम की मात्रा बढने से गुर्दा खराब होने का डर बना रहता है। कनाडा के डॉ. पीटर लेन ने बताया कि नई दवा में रिसेप्टर इन्हिबिटर हैं जो ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रखते हैं लेकिन सोडियम को कोशिकाओं में नहीं जाने देते। इससे ब्लड प्रेशर व गुर्दा खराब होने की आशंका नहीं रह जाती है।
महिलाओं में हार्मोनल थैरेपी से मधुमेह कंट्रोल
आगरा डायबिटिक फोरम के डॉ. सुनील बंसल ने बताया कि 45 साल की उम्र में महिलाओं में मीनोपॉज होता है, इस दौरान हार्मोन का स्तर गड़बड़ा जाता है, इससे 20 फीसद महिलाएं मधुमेह की शिकार भी हो रही हैं। इस तरह के केस में हार्मोनल थैरेपी दी जाती थी लेकिन इससे ह्रदय रोग होने का खतरा रहता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। एक ही हार्मोन एस्ट्रोजन दिया जाता है, इससे मधुमेह को कंट्रोल करने के साथ ह्रदय रोग की आशंका भी कम हो रही है।