आगरा

हर्निया में मात्र 5 फीसदी ऑपरेशन ही लेप्रोस्कोपिक विधि से, पुराने सर्जन दिखा रहे नीरसता, जानिए क्यों

गॉल ब्लैडर के मामले में जहां आज लगभग 80 फीसदी ऑपरेशन लेप्रोस्कोपिक विधि से हो रहे हैं

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May 12, 2018
Hernia

आगरा। गॉल ब्लैडर के मामले में जहां आज लगभग 80 फीसदी ऑपरेशन लेप्रोस्कोपिक विधि से हो रहे हैं, वहीं हर्निया में यह प्रतिशत मात्र 5 है। नई पीढ़ी तो लेप्रोस्कोपिक ट्रेनिंग के लिए उत्साहित दिखती है, लेकिन पुराने सर्जन में इसे सीखने के प्रति थोड़ी नीरसता है। यह कहना था महात्मा गांधी विवि ऑप मेडिकल साइंस ऑफ टैक्नोलॉजी, जयपुर के अध्यक्ष डॉ. एमसी मिश्रा का।

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किए गए 16 आॅपरेशन
उन्होंने बताया कि दोनों ओर हर्निया होने की स्थिति में लेप्रोस्कोपिक विधि से एक साथ दोनों ओर ऑपरेशन किया जा सकता है, जबकि ओपन विधि में यह रिस्की है। उन्होंने लेप्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन कर रहे सर्जन को ओपन व लेप्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन की फीस में समानता रखने के लिए भी प्रेरित किया। कार्यशाला के आर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. एसडी मौर्या ने बताया कि जीभ के कैंसर जैसे जटिल ऑपरेशन सहित कार्यशाला के पहले दिन दूरबीन विधि से 16 ऑपरेशन किए गए। जिसमें पित्त की थैली व नलों, रसौली, हर्निया, गुर्दे की पथरी, पैर की नस खोलने का, प्रोस्टेट ग्रंथि, जिगर के सिस्ट के ऑपरेशन थे।

डॉ. अमित व डॉ. समीर को किया गया पुरस्कृत
आयोजन समिति के सचिव डॉ. अमित श्रीवास्तव व डॉ. समीर कुमार को इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ सर्जन्स (इंडियन सेक्शन) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. यूएस धालीवाल ने स्पेशल अवार्ड से सम्मानित किया गया। एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सेंथिल कुमार ने कहा कि हमारा प्रयास लैप्रोस्कोपिक की तकनीक की सुविधा को हर व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसके लिए 70 देश मिलकर एक साथ काम कर रहे हैं।

Published on:
12 May 2018 06:22 pm
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