अधिवक्ता को मिल गया न्याय, आईपीएस अधिकारी सहित आठ पुलिसकर्मियों पर थे संगीन आरोप।
आगरा। अधिवक्ता को आखिर में न्याय मिल ही गया। मामला चार वर्ष पुराना है। अधिवक्ता का आरोप था कि आईपीएस अधिकारी सहित आठ पुलिसकर्मियों ने घर में घुसकर पिटाई की है। इस संगीन आरोप में मानवाधिकार आयोग ने अधिवक्ता के पीड़ित छह परिवारीजनों को छह सप्ताह के अंदर दो दो लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का आदेश मुख्य सचिव को दिया है।
ये है मामला
लोहामंडी सर्किल में 2013 में सीओ रहे आईपीएस अधिकारी प्रभाकर चौधरी समेत आठ पुलिसकर्मी मानवाधिकार उल्लंघन के दोषी पाए गए हैं। मामला 14 मई, 2013 का है। अधिवक्ता नितिन वर्मा के भाई अभिषेक वर्मा को कोबरा पुलिस ने बाइक से टक्कर मार दी। वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने तत्कालीन एसपी सिटी पवन कुमार से इसकी शिकायत की। इससे पुलिसकर्मी बुरा मान गए। आरोप है कि सीओ लोहामंडी प्रभाकर चौधरी, लोहामंडी थाने के प्रभारी त्रिपुरेर कौशिक, कांस्टेबल पवन कुमार, उदयवीर सिंह, महेन्द्र कुमार, दुर्गेश सिंह और 10-12 अन्य पुलिसकर्मियों ने नितिन वर्मा के घर में घुसकर उनकी गर्भवती पत्नी और अन्य परिवारीजनों की पिटाई कर दी।
चर्चित रहा मामला
ये मामला बेहद चर्चित रहा। मीडिया में भी खूब खबरें प्रकाशित हुईं। अधिवक्त नितिन वर्मा ने इसकी शिकायत आईजी, डीआईजी समेत सभी उच्च अधिकारियों से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने राज्यपाल से भी शिकायत की। इस पर डीएम ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए। इसमें पुलिसकर्मी दोषी पाए गए।
पुलिसकर्मियों पर केस का आदेश
पुलिस ने नितिन वर्मा के परिवार पर केस दर्ज कर दिए। इसकी शिकायत मानवाधिकार आयोग से की गई। इसके बाद केस सीबीसीआईडी ट्रांसफर किए गए। कांस्टेबल पवन कुमार ने एससी/एसटी का केस दर्ज कराया, यह फर्जी साबित हुआ। आयोग ने आरोपी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर के आदेश भी दिए थे। अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की। जिस पर बाद में उनको माफी मांगनी पड़ी थी। अब आयोग ने नितिन वर्मा के परिवार के छह पीड़ित सदस्यों को दो-दो लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की सिफारिश की है। नितिन वर्मा ने इस आदेश की जानकारी प्रेस वार्ता में दी। इस दौरान अन्य अधिवक्ता भी मौजूद रहे।