
आगरा। ताजनगरी में भगवान शिव की कृपा बरसती है। यहां के चारों कोनों पर भगवान शिव विराजमान है। श्रावण मास के चारों सोमवारों पर आगरा में मेला लगता है। शिव मंदिरों पर लगने वाले मेले में इस बार जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार ने लेखपाल, राजस्व निरीक्षकों की ड्यूटी लगाई है। सुबह चार बजे से लेखपाल मौजूद रहेंगे। मेले के एक दिन पहले रविवार को सभी नियुक्त कर्मचारियों को स्थिति पर सतर्क दृष्टि रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक महत्वपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी तहसीलदार सदर को देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पहले सोमवार को लगेगा राजेश्वर मंदिर पर मेला
पहले सोमवार को थाना ताजगंज क्षेत्र के श्रीराजेश्वर मंदिर, राजपुर चुंगी पर मेला लगेगा। इसके लिए राजस्व निरीक्षक बरौली अहीर, राजीव कुमार लेखपाल सहित रविंद्र कुमार, संजय कुमार, सतीश चंद्र जैन को नियुक्त किया गया है।
बल्केश्वर पर इनकी रहेगी ड्यूटी
बल्केश्वर पर छह अगस्त को मेला लगेगा। इसके लिए राजस्व निरीक्षक बिचपुरी के साथ लेखपाल अतुल कृष्ण कौशल, देवेंद्र कुमार, सतीश चंद्र कुशवाह, सजल कुमार को नियुक्त किया गया है।
कैलाश महादेव पर तीसरा मेला
सिकंदरा स्थित श्री कैलाश महादेव मंदिर पर 13 अगस्त को मेले का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए राजस्व निरीक्षक कुंडौल के साथ लेखपाल सत्यवीर सिंह, मधुराज सिंह, अनिल सोलंकी, कोमल सिंह को तैनात किया गया है।
शिवमंदिर पृथ्वीनाथ पर चौथा मेला
चौथा मेला शाहगंज के श्रीशिव मंदिर पृथ्वीनाथ पर 20 अगस्त को लगेगा। यहां राजस्व निरीक्षक अकोला के साथ शैलेंद्र कुमार, वीरेंद्र कुमार, रामजीलाल और माजिद हसन की ड्यूटी लगाई गई है। वहीं शिव मंदिर रावली और मनकामेश्वर मंदिर पर सावन के हर सोमवार को भारी भीड़ जुटती है। यहां प्रशासन द्वारा लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई हैं।
लेखपालों की नहीं सुनती सरकार
वहीं इस संबंध में लेखपाल संघ के मीडिया प्रभारी अश्विनी कुमार का कहना है कि सरकारें लेखपालों की ओर ध्यान नहीं देती हैं। लेखपाल अपने सरकारी कार्यों को करते हैं। वहीं शहर में ओलावृष्टि, आंधी तूफान की जांच, मकानों के क्षतिग्रस्त होने, मरने वालों को 24 घंटे में दैवीय आपदा राहत कोष सहायता राशि बंटवाना आदि काम करते हैं। ऐसे में रविवार से सावन माह में मन्दिरों पर सुबह चार बजे से देर रात्रि तक व्यव्यस्था के लिए ड्यूटी देना इसके अतिरिक्त शहर में कहीं कोई घटना आग लगने, सिलिंडर फटना, मकान गिरना, दंगा होना इस सब कार्यों को करने के लिए कोई संसाधन नहीं है। साइकिल भत्ते के रूप में प्रतिदिन तीन रुपये 33 पैसे दिए जाते हैं। सरकारें लेखपालों के भत्ते की तरफ कोई ध्यान नहीं है।