
आगरा। ये युवाओं की नहीं, बल्कि 11 साल के ऐसे मासूमों की कहानी है, जो अभी ठीक से अपराध का मतलब भी नहीं समझते हैं। ये मासूम इतने शातिर हुए, कि स्कूटी चलाने का शौक पूरा करने के लिए चोरी का रास्ता चुन लिया। स्कूटी चुराने में इन्हें कुछ मिनट ही लगते थे। चोरी करने के बाद जब तक स्कूटी में पेट्रोल रहता, उसे दौड़ाते, फिर रोड़ पर कहीं भी छोड़कर भाग जाते।
पूछताछ में खोला राज
मामला थाना न्यू आगरा क्षेत्र के कमला नगर का है। यहां के एक कांप्लेक्स के बाहर से एक 11 साल का बालक स्कूटी की डिकी खोलने का प्रयास कर रहा था। स्कूटी मालिक ने उसे देख लिया। उसने बालक को पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने उससे पूछताछ की। उसने बताया कि वह शौक पूरा करने के लिए स्कूटी चोरी करते हैं। वह न्यू आगरा क्षेत्र के एक मोहल्ले में रहता है। घर के पास ही रहने वाली एक बालिका से उसकी दोस्ती है। वह भी चोरी में साथ देती है। बालक और बालिका हरीपर्वत क्षेत्र स्थित स्कूल में पढ़ते हैं।
एक वर्ष पहले की पहली चोरी
पुलिस को बताया कि एक दिन छात्र ने अपने दोस्तों को स्कूटी पर आता देखा था। इसलिए खुद भी स्कूटी लाने की सोची। मगर, घरवालों ने मना कर दिया। इस पर दोनों ने एक साल पहले स्कूटी चारी की। घर में झूठ बोल दिया कि दोस्त की लेकर आए हैं। इसके बाद दोस्तों को बताया कि वह खरीदकर लाए हैं। स्कूटी में जब तक पेट्रोल रहता, उसे चलाते थे। इसके बाद सड़क पर कहीं भी खड़ी करके चल देते थे। इसी तरह कई स्कूटी को चोरी कर चुके हैं। बालक के पास से चाभियों का गुच्छा भी मिला, जिसमें स्कूटी की कई चाभियां थीं।
इन चोरियों से पुलिस थी परेशान
इंस्पेक्टर थाना न्यू आगरा के मुताबिक, क्षेत्र में कई बार एक्टिवा चोरी की घटनाएं हुईं। इनमें से कई एक्टिवा कुछ दिन बाद बरामद हो जाती थीं। इससे पता नहीं चल पा रहा था कि स्कूटी को कौन चुरा रहा है। पकड़े गए बालक और बालिका ही एक्टिवा को चोरी करते थे। कुछ दिन चलाने के बाद छोड़ जाते थे। पकड़े गए बालक के पिता नहीं हैं। पुलिस ने उसकी मां को बुलाया। वहीं बालिका के माता-पिता को बुलाया गया। दोनों ने सुना तो शर्मिंदा हुए।
ये बोले अधिकारी
सीओ हरीपर्वत एएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि दोनों 11 साल के हैं।
उन्हें किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जाएगा। अभी उन्हें परिवारीजनों के सुपुर्द किया गया है। स्कूटी चोरी करने के बाद दोनों डिकी चेक करते थे। उसमें कभी पर्स तो कभी टिफिन में भोजन मिलता था। पर्स में रुपये मिलने पर खर्च कर देते थे।