
आगरा। अकबर का मकबरा राष्ट्रीय राजमार्ग दो पर स्थित है। वर्तमान में जहां सिकंदरा स्मारक है, वहां सिकन्दर की सेना का पड़ाव था। उसी के नाम पर इस जगह का नाम सिकंदरा पड़ा। सिकंदरा में मकबरे का निर्माण कार्य स्वयं अकबर ने शुरू करवाया था, लेकिन इसके पूरा होने से पहले ही अकबर की मृत्यु हो गई। बाद में उनके पुत्र जहांगीर ने इसे पूरा करवाया। यह मकबरा हिंदू, ईसाई, इस्लामिक, बौद्ध और जैन कला का सर्वोत्तम मिश्रण है।
ये है इतिहास
अकबर का मकबरा, जैसा नाम से प्रतीत होता है, यहां मुगल सम्राट अकबर की कब्र है। इसका निर्माण 1605 से 1613 के बीच हुआ। आम जनता के लिए 1613 में खोला गया। स्मारक के चारों ओर हरियाली है। इसके अलावा कई अन्य स्मारक भी हैं। यह मकबरा हिंदू, ईसाई, इस्लामिक, बौद्ध और जैन कला का सर्वोत्तम मिश्रण है। लेकिन इसके पूरा होने से पहले ही अकबर की मृत्यु हो गई। बाद में उनके पुत्र जहांगीर ने इसे पूरा करवाया। जहांगीर ने मूल योजना में कई परिवर्तन किए। इस इमारत को देखकर पता चलता है कि मुगल कला कैसे विकसित हुई। दिल्ली में हुमायूं का मकबरा, फिर अकबर का मकबरा और अंतत: ताजमहल, मुगलकला निरंतर विकसित होती रही। सिकंदरा का नाम सिकंदर लोदी के नाम पर पड़ा। मकबरे के चारों कोनों पर तीन मंजिला मीनारें हैं। ये मीनारें लाला पत्थर से बनी हैं जिन पर संगमरमर का सुंदर काम किया गया है। मकबरे के चारों ओर खूबसूरत बगीचा है जिसके बीच में बरादी महल है जिसका निर्माण सिकंदर लोदी ने करवाया था। सिकंदरा से आगरा के बीच में अनेक मकबरे हैं और दो कोस मीनार भी हैं। पांच मंजिला इस मकबरे की खूबसूरती आज भी बरकरार है।
ये है शुल्क
आगरा-दिल्ली हाईवे (एनएच-2) पर अकबर का मकबरा, यानि सिकंदरा स्मारक बना हुआ है। इस स्मारक के चारों ओर हरियाली है। सिकंदरा स्मारक में प्रवेश के लिए भारतीय, सार्क देश और बिम्सटेक देशों के नागरिकों को 20 रुपये का टिकट लेना पड़ता है। वहीं विदेशी पर्यटकों को 210 रुपये का टिकट है। सार्क देश हैं- नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव, अफगानिस्तान।
कहां है और कैसे पहुंचे
आगरा दिल्ली हाईवे पर सिकंदरा स्मारक है। आगरा-दिल्ली हाईवे पर होने के कारण पहुंचने की कोई समस्या नहीं है। शहर के हर कोने से सिकंदरा तक बस या टेम्पो चलते हैं। दिल्ली से कानपुर और कानपुर से दिल्ली की ओर आने-जाने वाली प्रत्येक बस सिकंदरा चौराहे पर रुकती है।