आगरा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि नागरिकता संशोधन कानून नागरिकता देने का कानून है, लेने का नहीं। उन्होंने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद आतंकवाद समाप्त हो गया है, इसलिए विपक्ष पाकिस्तान की भाषा बोल रहा है।
आगरा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि नागरिकता संशोधन कानून नागरिकता देने का कानून है, लेने का नहीं। उन्होंने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद आतंकवाद समाप्त हो गया है, इसलिए विपक्ष पाकिस्तान की भाषा बोल रहा है।
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विपक्ष के मुद्दे समाप्त
श्री योगी कोठी मीना बाजार मैदान में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में आयोजित भाजपा की रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के कारण कांग्रेस, सपा, बसपा, वामपंथी दलों और अन्य क्षेत्रीय दलों की लूटखसोट की दुकानें बंद हो गई हैं। यही लोग कानून को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। हमारा दायित्व बनता है कि जनता को वास्तवरकिता से अवगत कराएं। हमें श्रेष्ठ भारत की रचना करनी है। विपक्ष की चिढ़ का कारण है जिन मुद्दों को वोट बैंक से जोड़ा था, वे समाप्त हो गए हैं। मोदी ने सबकी बात की है। हर गरीब को शौचालय, रसोई गैस, विद्युत संयोजन, पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा, किसानों को सम्मान मिल रहा है।
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विपक्ष बौखलाया
उन्होंने कहा कि भारत के सम्मान और स्वाभिमान से जुड़ें मुद्दों को हल करने की कार्यवाही हो रही है। इससे विपक्ष को स्वाभाविक रूप से बौखलाहट है। कश्मीर से धारा 370 समाप्त होना आतंकवादी के ताबूत में अंतिम कील है, इसीलिए विपक्ष पाकिस्तान की भाषा बोल रहा है। अयोध्या में 500 वर्षों से मंदिर निर्माण की मांग चली आ रही थी। लाखों हिन्दू शहीद हुए। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण मोदी के नेतृत्व में लिखा हुआ है। हम सब गौरवशाली हैं कि अपनी आँखों से भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण देख रहे हैं।
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शरणागत की रक्षा के लिए कानून
श्री योगी ने कहा कि भारत की परंपरा है शरण में आए हुओं की रक्षा करना। इसी का अनुसरण करते हुए नागरिकता संशोधन कानून लाया गया है। यह किसी के विरोध में नहीं है। इस सबके बावजूद विरोध हो रहा है। यह नागरिकता देने का कानून है, लेने का नहीं। वास्तविकता को समझें। इसी को अवगत कराने के लिए जेपी नड्डा का आगमन आगरा की धरती पर हुआ है। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में उपद्रव नहीं होने दिया जाएगा।