UP Rain: यूपी में पश्चिमी विक्षोभ का असर दिखने लगा है। गुरुवार को अयोध्या सहित कई जिलों में बूंदाबांदी हुई है। मौसम विभाग ने अगले 5 दिनों के लिए बारिश- आंधी तूफान का अलर्ट जारी किया है।
UP Rain: यूपी में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। शुक्रवार को आगरा, मथुरा समेत कई जिलों में बारिश और तेज आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। बहराइच, गोंडा और कानपुर सहित कई शहरों में बादलो की आवाजाही शुरू हो गई है। हवाएं तेज चल रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रह सकता है।
UP Rain: यूपी में मौसम लगातार बदल रहा है। लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली है। शुक्रवार को आगरा, मथुरा समेत करीब 18 जिलों में बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं 15 से ज्यादा शहरों में सुबह से बादल छाए हुए हैं। कई जगहों पर तेज हवाएं चल रही हैं। बीच-बीच में हल्की धूप भी निकल रही है। जिससे मौसम सुहावना बना हुआ है। इससे पहले गुरुवार रात अयोध्या में हल्की बारिश दर्ज की गई। जबकि ललितपुर में तेज आंधी के साथ बारिश हुई। कुछ इलाकों में ओले भी गिरे। जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। तेज हवा के कारण छप्पर उड़ गए।
हालांकि अंदर मौजूद लोगों को पूरी तरह से सुरक्षित रहे। मौसम विभाग के अनुसार, इस बदलाव की वजह पश्चिमी विक्षोभ है। जो लगातार सक्रिय हो रहा है। अरब सागर से आ रही नमी के कारण बारिश और आंधी का असर बढ़ेगा। आने वाले दिनों में कई इलाकों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। साथ ही ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है। तापमान में भी 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने का अनुमान है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 3 अप्रैल से लेकर 8 अप्रैल तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, तेज हवा और गरज-चमक का सिलसिला जारी रहेगा। 4 और 5 अप्रैल को पूर्वी और पश्चिमी यूपी में बारिश और ओले गिरने की संभावना है। 6 अप्रैल को पूर्वी हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। जबकि पश्चिमी इलाकों में मौसम साफ रहेगा। 7 और 8 अप्रैल को भी कुछ जगहों पर बारिश और तेज हवाएं चलने के आसार हैं।
इस बेमौसम बारिश और आंधी का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। कई जगहों पर फसलें खराब हो गई हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि फसल नुकसान का जल्द आकलन किया जाए। प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा दिया जाए। ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।