लिखित परीक्षा का शिक्षामित्रों द्वारा किया जा रहा विरोध
आगरा। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की बैठक डायट परिसर आगरा में आयोजित हुई। बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष वीरेन्द्र छोंकर ने बताया कि इस प्रक्रिया के अनुसार पूरे प्रदेश में 42 हजार टीईटी पास शिक्षामित्रों में से केवल 8 हजार शिक्षामित्र ही शिक्षक बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षामित्रों के साथ फिर धोखा किया है।
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शिक्षामित्रों को शिक्षक बनने से रोक रही सरकार
वीरेन्द्र छोंकर ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 25 जुलाई के आदेश में राज्य सरकार को निर्देशित किया था कि शिक्षामित्रों को आयु एवं शैक्षिक योग्यता में विशेष भारांक प्रदान करते हुए सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया जा सकता है, जबकि प्राथमिक शिक्षक के लिए न्यूनत शैक्षिक योग्यता स्नातक के साथ दो वर्षीय बीटीसी प्रशिक्षण है, जोकि 1 लाख 72 हजार शिक्षामित्र उपरोक्त आर्हता को पूर्ण करते हैं। मगर सरकार जबरदस्ती लिखित परीक्षा कराकर शिक्षामित्रों को शिक्षक बनने से रोक रही है। जिसे शिक्षामित्र न्यायालय में चुनौती देंगे।
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18 जनवरी का इंतजार
साथ ही 18 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका पर होने वाली सुनवाई की भी पूर्ण तैयारी कर ली गई है। बैठक में मुख्य रूप से शिशुपाल सिंह चाहर, रामनिवास, मुकेश भदौरिया, रघुवीर शर्मा, रनवीर सिंह सिकरवार, यदुवरी सिंह यादव, सतेन्द्र शर्मा, संध्या देवी, रचना शर्मा, कमलेश कुमारी, अनीता आदि मौजूद रहीं।
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