
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम और माता सीता के विवाह का दिन यानी विवाह पंचमी 23 नवंबर 2017 को है। हर वर्ष मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। भृगु संहिता में विवाह पंचमी को बेहद शुभ दिन के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। इसे अबूझ मुहुर्त बताया गया है। यानी इस दिन किसी की भी शादी बगैर कुछ सोचे समझे की जा सकती है। इसके बावजूद इस दिन लोग अपनी बेटियों का विवाह नहीं करते। लोगों की मान्यता है कि विवाह के पश्चात माता सीता को काफी संकटों का सामना करना पड़ा था, ऐसे में उन्हें डर रहता है कि कहीं उनकी बेटी को भी जीवन में परेशानियां न झेलनी पड़े। लिहाजा बेटी के सुखमय जीवन के लिए लोग इस दिन बेटी का विवाह करने से परहेज करते हैं।
राम चरित मानस का पाठ सिर्फ विवाह प्रकरण तक
आगरा में रह रहे मनु थापा जो मूलरूप से नेपाल के निवासी हैं, वे बताते हैं कि माता सीता मिथिला की बेटी थीं और मिथिला नेपाल का हिस्सा है, इसलिए भारत के अलावा नेपाल में भी भगवान राम सीता के विवाह का ये दिन बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन छोटे बच्चों को राम सीता बनाकर उनकी पूजा की जाती है। कई जगहों पर झांकियां लगती हैं। रामलीला होती है। राम बारातें निकलती हैं। काफी लोग अपने घरों में राम चरित मानस का पाठ कराते हैं, लेकिन वो पाठ केवल माता सीता के विवाह प्रकरण तक ही होता है। इसके आगे का जिक्र नहीं होता क्योंकि इसके बाद माता सीता का वैवाहिक जीवन काफी दुखद था।
भगवान राम और माता सीता के विवाह की कथा
शास्त्रों के मुताबिक भगवान राम को विष्णु भगवान और माता सीता को लक्ष्मी मां का रूप माना गया है। भगवान राम ने राजा दशरथ के घर सबसे बड़े पुत्र के रूप में जन्म लिया था, वहीं माता सीता धरती से उत्पन्न हुईं थीं और हल चलाते समय राजा जनक को मिलीं थीं। राजा जनक के घर भगवान शिव का दिया एक धनुष रखा था जिसे परशुराम के अलावा कोई नहीं उठा सका था, इसलिए राजा जनक ने यह निर्णय लिया था कि परशुराम के अतिरिक्त जो व्यक्ति धनुष को उठा लेगा उसी के साथ माता सीता का विवाह होगा। जब सीता मां का स्वयंवर हुआ तो उसमें तमाम लोग पहुंचे लेकिन कोई उस धनुष को हिला भी नहीं सका।
तब भगवान राम ने धनुष को उठाया था। उसके बाद माता सीता का विवाह उनके साथ हुआ था। लेकिन विवाह के बाद माता को भगवान राम के साथ वनवास जाना पड़ा, उनका हरण हुआ फिर त्याग कर दिया गया। इस दुखद जीवन के कारण इस दिन राम लीला या राम कथा में सिर्फ राम सीता के विवाह तक का प्रकरण सुनाया जाता है और उनके रिश्ते को आदर्श पति पत्नी, बेटे बहू, भाई भाभी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है और दोनों की शादी की वर्षगांठ को धूमधाम से मनाया जाता है।