शिवपाल यादव ने समाजवादी सेक्युलर मोर्चे का गठन एक दिन में नहीं किया, बल्कि पिछले कई महीनों से वे इसकी तैयारी कर रहे थे। जानिए उन्होंने क्या क्या किया इस बीच।
आगरा। समाजवादी पार्टी में लंबे समय से उपेक्षा का शिकार शिवपाल यादव ने समाजवादी सेक्युलर मोर्चे के गठन का ऐलान का प्रदेश की राजनीति को फिर से गर्म कर दिया है। लेकिन बता दें कि शिवपाल का ये समाजवादी सेक्युलर मोर्चा सिर्फ एक दिन में ही तैयार नहीं हुआ है। वे पिछले कई महीनों से इसकी तैयारी कर रहे थे। लंबे समय से सपा में उनको कोई बड़ा पद न मिलने के कारण बुधवार को शिवपाल ने इसका ऐलान किया है।
मैनपुरी, फिरोजाबाद, एटा, बदायूं का किया दौरा
सूत्रों के मुताबिक शिवपाल करीब सवा महीने से यूपी के तमाम हिस्सों का दौरा कर रहे थे ताकि संगठन को मजबूत कर सकें। इस बीच उन्होंने सपा का गढ़ कहे जाने वाले शहर मैनपुरी, फिरोजाबाद, एटा, बदायूं और बरेली समेत तमाम शहरों का लगातार दौरा किया। जब भी वह किसी जिले में जाते तो अपने समर्थकों से जरूर मिलते थे। इस बीच धीरे धीरे उन्होंने तमाम समर्थकों को अपने साथ ले लिया। इसके अलावा उन्होंने लोहिया ट्रस्ट को सक्रिय कर दिया था। वे खुद इस ट्रस्ट के सचिव बने। हर दिन वे इस ट्रस्ट में समर्थकों से मुलाकात करते थे।
पिछले साल ही करना चाहते थे गठन
बताया जा रहा है कि शिवपाल तो पिछले साल ही समाजवादी सेक्युलर मोर्चे का गठन करना चाहते थे, लेकिन मुलायम सिंह यादव ने उन्हें रोक दिया था और उन्हें पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने की बात कही थी। लेकिन साल भर से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी उन्हें महासचिव बनाए जाने पर कोई फैसला नहीं हुआ। इसके बाद शिवपाल ने समाजवादी सेक्युलर मोर्चे के गठन की तैयारी शुरू की और 29 अगस्त को इसका ऐलान किया।
समर्थकों के अलावा सपा विरोधियों से बढ़ाया मेलजोल
समाजवादी सेक्युलर मोर्चे को मजबूत करने के लिए शिवपाल समर्थकों के अलावा ऐसे लोगों से मेलजोल बढ़ाया जो समाजवादी पार्टी के विरोधी थे। इस बीच उन्होंने कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर, एसपी से किनारा करने वाले निषाद पार्टी के भदोही से विधायक विजय मिश्रा से संपर्क किया। वे सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मिले और अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि कलश यात्रा में भी शामिल हुए थे।