
आगरा। निकाय चुनाव में नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अभी तक रालोद और बसपा ने अपने प्रत्याशियों के नाम का एलान किया है। भारतीय जनता पार्टी के नाम का एलान अगले 48 घंटे में होगा। सत्तारुढ़ दल होने के चलते भारतीय जनता पार्टी में इस बार दावेदारों की लंबी चौड़ी फेहरिस्त शामिल है। पार्षद के लिए जहां सौ वार्डों के लिए हजार से अधिक आवेदन आए हैं, वहीं मेयर की दावेदारी के लिए भी दर्जनों दावेदारों ने अपने आवेदन पार्टी के प्रतिनिधियों को सौंपे हैं। सस्पेंस खत्म होने में अब बस कुछ ही घंटे का इंतजार है। लेकिन आंकड़े जो कहानी बयां कर रहे हैं उन पर गौर किया जाए, तो भारतीय जनता पार्टी से मेयर की दावेदारी में वैश्य चेहरे के वरीयता दी जा सकती है।
तीन नामों में छिड़ी है जंग
मेयर की सीट पर भाजपा का कब्जा पिछले कई सालों से लगातार रहा है। भारतीय जनता पार्टी के टिकट से मेयर का चुनाव लड़ने की दावेदारी करने वालों की इस बार कतार और लंबी हो गई। प्रत्याशी के नाम के चयन के लिए बनाए गए जनप्रतिनिधियों के पैनलों में तीन नामों को लेकर खींचतान चली आ रही है। ताजनगरी में कुल 12.52 लाख वोटर हैं। यहां वैश्य वोटरों का आंकड़ा करीब साढ़े पांच लाख वोट से अधिक का है। वहीं ब्राह्मण वोट करीब पौने दो लाख है। दलित वोट भी वैश्य वोट को टक्कर देने वाला है। तो क्षत्रिय वोट भी डेढ़ लाख के करीब है। सामान्य सीट के चलते इस बार दावेदार अधिक हैं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस बार वैश्य चेहरे पर यदि भारतीय जनता पार्टी दांव खेलती है, तो उसे कामयाबी मिलने की संभावनाएं अधिक रहेंगीं। ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि बहुजन समाज पार्टी ने क्षत्रिय चेहरे को टिकट थमाया है और रालोद ने जाट प्रत्याशी खड़ा किया है। वहीं समाजवादी पार्टी के नाम पर ब्राह्मण वोटर का नाम जोरों पर चल रहा है। ऐसे में यदि वैश्य चेहरा भाजपा उतारती है, तो उसे फायदा होगा।
पैनल में नामों पर चल रही हैं खींचतान
जनप्रतिनिधियों के पैनल में जो नाम हैं, उनमें खींचतान चल रही है। सूत्रों के मुताबिक कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों में एक नाम को लेकर लंबी रस्साकसी चल रही है। लेकिन, पार्टी हाईकमान इस नाम को घोषित करने के लिए पशोपेश में है। पुराने कार्यकर्ता को पार्टी मेयर का टिकट थमाना चाहती है। अब महज कुछ घंटे में ही पार्टी नाम की घोषणा करेगी। लेकिन पार्टी विवादों के बीच प्रत्याशी को उतारने के मूड में नहीं है।