-जेल प्रशासन की मेहनत और मार्गदर्शन से पढ़ने को प्रेरित हो रहे कैदी, शिक्षा के माध्यम से डिप्रेशन से बाहर आकर मुख्यधारा से जुड रहे हैं कैदी, बोर्ड परीक्षा पास करने वाले कैदियों को किया जाएगा सम्मानित
Ahmedabad. जेल की ऊंची चारदीवारी और लोहे की सलाखों के पीछे सामान्यतः अंधकार, पछतावा और अकेलेपन की स्थिति होती है। इसके इतर गुजरात राज्य की जेलों में कैदियों को शिक्षा के जरिए समाज में उनका पुनर्वास करने की पहल की जा रही है। इसके सार्थक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं।
गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से इस वर्ष फरवरी-मार्च में ली गई 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में राज्य की जेलों में बंद 44 कैदियों ने बाजी मारी है। 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 22 और इतने ही कैदी 12वीं की बोर्ड परीक्षा में उत्तीर्ण हुए।
गुजरात के प्रभारी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डॉ. के. एल. एन. राव ने इस पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले कैदियों को राज्य के जेल विभाग की ओर से प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। जेल के कैदियों के प्रतिभाशाली बच्चों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।उन्होंने बताया कि राज्य के जेल विभाग की ओर से कैदियों को बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भरवाने से लेकर पुस्तकों, अध्ययन सामग्री और विभिन्न विषयों की कक्षाओं तक की सभी सुविधा जेल में ही उपलब्ध कराई जा रही है। जेल परिसर में ही बोर्ड परीक्षा केंद्र की भी व्यवस्था की गई है, ताकि वे अनुकूल वातावरण में परीक्षा दे सकें।
अहमदाबाद मध्यस्थ कारागार में बंद एक कैदी ने कहा कि सजा मिलने के बाद लगता था कि जीवन समाप्त हो गया है। लेकिन जेल में चल रहे रेडियो प्रिजन, वेलफेयर ऑफिस और अन्य कार्यों के लिए जेल अधिकारियों से प्रेरणा मिली। जेल अधीक्षक गौरव अग्रवाल ने मुझे फिर से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया और काफी मदद भी की। खुशी है कि मैंने 10वीं की बोर्ड परीक्षा पास कर ली है।
10वीं बोर्ड परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले एक अन्य बंदी ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण उसकी पढ़ाई बीच में छूट गई थी और सजा के बाद वह डिप्रेशन में चला गया था। लेकिन जेल अधिकारियों के काउंसलिंग और प्रोत्साहन से फिर पढ़ाई शुरू की।12वीं की बोर्ड परीक्षा में पास हुए एक अन्य कैदी ने कहा कि जेल में होने के बावजूद मेरे सपने जीवित हैं। मैं सप्ताह में दो दिन संगीत की कक्षा में भी भाग लेता हूं। बाहर जाकर गायक बनने की इच्छा है।
जेल प्रशासन की ओर से साबरमती जेल व अन्य जेल में आधुनिक लाइब्रेरी, कंप्यूटर की सुविधा है। यहां पुस्तकों के साथ-साथ ऑडियो बुक भी है। किताबें कैदियों जीवन में सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास विकसित करने में मदद करती हैं। जेल विभाग द्वारा नियमित रूप से विशेष व्याख्यानों का आयोजन किया जाता है, जिनमें स्कूल-कॉलेज के शिक्षक और विषय विशेषज्ञ जेल के अंदर जाकर कैदियों को पढ़ाते हैं, जिसके चलते 44 कैदी पास हुए हैं।