छह वर्ष में 445 ब्रेनडेड घोषित किए, 700 से अधिक जरूरतमंदों को मिली नई जिंदगी , अंगदान के लिए 223 मरीजों के परिजन आए सामने
Ahmedabad: दुख की घड़ी में भी जब परिजनों ने अपने प्रियजनों के अंगदान का निर्णय लिया, तब उन्होंने मानवता की ऐसी महक फैलाई जिसने 700 से अधिक जरूरतमंदों को नई जिंदगी दी। एशिया के सबसे बड़े अहमदाबाद सिविल अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि पिछले छह वर्षों में कुल 445 मरीजों को ब्रेन डेड घोषित किया गया, जिनमें से 223 के परिजनों ने अंगदान की सहमति दी। यानी लगभग 50 फीसदी मामलों में ही अंगदान संभव हो सका, लेकिन इन अंगों ने अनगिनत परिवारों में उम्मीद की रोशनी जगाने का काम किया।वर्ष 2022 इस अवधि का सबसे अहम वर्ष रहा, जब 105 मरीजों को ब्रेन डेड घोषित किया गया और इनमें से 70 के परिजनों ने अंगदान किया। इस वर्ष कुल 218 अंग दान में मिले, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं जारी वर्ष (2025) में अब तक 107 ब्रेन डेड घोषित किए इनमें से 48 के अंगदान हुए और 171 अंग जरूरतमंदों तक पहुंचे। 2023 में 112 मरीजों को ब्रेन डेड घोषित किया गया, लेकिन केवल 42 के अंगदान हुए, जिससे 136 अंग उपलब्ध हो सके।
सिविल अस्पताल के रिकॉर्ड बताते हैं कि 2020 से 2025 के बीच कुल 739 अंग और 194 ऊतक (164 आंखें व 30 त्वचा) दान किए गए। इस तरह कुल 933 अंग व ऊतक दान से सैकड़ों मरीजों को जीवनदान मिला।
अहमदाबाद सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी के अनुसार गुजरात में अंगदान को लेकर लगातार जागरूकता बढ़ रही है लेकिन अभी और जागरूकता की जरूरत है। ब्रेनडेड मरीजों में से अब तक आधे के अंगदान किए हैं, यदि सभी ब्रेनडेड मरीजों के अंगों का दान होता तो अंगों की राह में बैठे मरीजों की कतार काफी कम हो जाती। लोगों में जागरूकता आने से यह कतार काफी कम होगी। उनके अनुसार अंगदान केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि मानवता का सबसे बड़ा उपहार है। जब परिवार अपने प्रियजन को खोने के दर्द में होते हुए भी दूसरों की जिंदगी बचाने का निर्णय लेते हैं, तब वे समाज में करुणा और उम्मीद का संदेश फैलाते हैं। यह कहानी हर उस परिवार की है जिसने अपने दुख को दूसरों की खुशी में बदल दिया।