
Ahmedabad: महानगरपालिका (मनपा) में गुरुवार को विभिन्न समितियों के अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की घोषणा कर दी गई। इसके साथ ही नई टीम की तस्वीर भी स्पष्ट हो गई।
पूर्व शहर भाजपा महामंत्री पराग नायक को अहमदाबाद म्यूनिसिपल ट्रांसपोर्ट सर्विस (एएमटीएस) समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही इन नियुक्तियों से मनपा के विकास कार्यों और नागरिक सेवाओं को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।मनपा की ओर से घोषित सूची के अनुसार बोडकदेव वार्ड के धरमशी देसाई को वाटर सप्लाई (जलापूर्ति) समिति, पालडी के जैनिक वकील को रोड एंड बिल्डिंग समिति, निकोल के दीपक पंचाल को हेल्थ एंड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट समिति तथा जोधपुर वार्ड के भाग्येश पटेल को टाउन प्लानिंग समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा स्टेडियम वार्ड के जितेंद्र खचरिया को रिक्रिएशन एंड हेरिटेज समिति, नरोडा के विपुल पटेल को लीगल समिति, विराटनगर के मुकेश पटेल को रेवन्यू समिति, लांभा की डॉ. चांदनी पटेल को हॉस्पिटल समिति, शाहपुर के हितेंद्र परमार को मटेरियल मैनेजमेंट समिति, नारणपुरा की दर्शन शाह को हाउसिंग एंड इम्प्रूवमेंट समिति तथा नरोडा वार्ड की पार्षद डिम्पल वरिंदानी को महिला एवं बाल विकास समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
समितियों के उपाध्यक्षों की बात करें तो वाटर समिति में विपुल सेवक को उपाध्यक्ष बनाया है। इसके अलावा रोड एंड बिल्डिंग समिति में प्रवीण पटेल, हेल्थ समिति में राकेश पटेल, टाउन प्लानिंग समिति में दिव्या खाखी, रिक्रिएशन समिति में रेखा देसाई, लीगल समिति में रणजीतसिंह वाला, रेवेन्यू समिति में विराट पुरोहित, हॉस्पिटल समिति में राजेंद्र जानी, मटेरियल समिति में संजय सथवारा, हाउसिंग समिति में मेहुल शाह तथा महिला एवं बाल विकास समिति में एकता रावल को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अहमदाबाद महानगरपालिका (मनपा) की विभिन्न समितियों के गठन में कांग्रेस के एक भी पार्षद को शामिल नहीं किया गया है। इस पर गुरुवार को मनपा ऑफिस में विपक्षी दल कांग्रेस ने विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस पार्षदों ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताते हुए हंगामा किया और बाद में वॉकआउट कर दिया।कांग्रेस के दरियापुर के पार्षद नीरव बक्षी ने पार्टी के अन्य पार्षदों के साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने विपक्ष की पूरी तरह अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि जब मनपा में कांग्रेस की सत्ता थी, तब भाजपा के पार्षदों को विभिन्न समितियों में सदस्यता दी गई थी।
विपक्ष की भूमिका का सम्मान किया जाता था। लेकिन अब भाजपा शासन में कांग्रेस के एक भी पार्षद को किसी समिति में स्थान नहीं दिया गया है। बक्षी ने कहा कि मनपा की समितियां शहर के विकास और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेती हैं। ऐसे में विपक्ष की अनदेखी करना स्वस्थ लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विपक्ष की आवाज दबाने जैसा है। कांग्रेस के अन्य पार्षदों ने भी इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया।