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ब्रेनडेड पति के अंगदान का पत्नी निर्णय, तीन मरीजों के लिए जीवन की नई आस

सिर में गंभीर चोट लगने के बाद जब अहमदाबाद सिविल अस्पताल में राजस्थान के डूंगरपुर निवासी 31 वर्षीय बाबूलाल डामोर को ब्रेनडेड घोषित किया गया, तब परिवार की दुनिया मानो थम गई। आंसुओं और असहनीय दुख के बीच भी पत्नी शांतिबेन डामोर ने ऐसा फैसला लिया, जिसने तीन अन्य परिवारों की उम्मीदों को नई सांस दे दी।
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Ahmedabad civil hospiatal organ Donation

अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में ब्रेन डेड मरीज के साथ चिकित्सक व अन्य।

Ahmedabad: सिर में गंभीर चोट लगने के बाद जब अहमदाबाद सिविल अस्पताल में राजस्थान के डूंगरपुर निवासी 31 वर्षीय बाबूलाल डामोर को ब्रेनडेड घोषित किया गया, तब परिवार की दुनिया मानो थम गई। आंसुओं और असहनीय दुख के बीच भी पत्नी शांतिबेन डामोर ने ऐसा फैसला लिया, जिसने तीन अन्य परिवारों की उम्मीदों को नई सांस दे दी। उनके अंगदान की सहमति से बाबूलाल का लिवर और दोनों किडनी अब तीन गंभीर मरीजों के लिए नवजीवन का आधार बनेंगी।

कलोल-छत्राल में रोजगारी पाने वाले व मूूलरूप से डूंगरपुर के बाबूलाल डामोर को 22 जून को दुर्घटनावश गिरने से सिर में गंभीर चोट लग गई थी। उन्हें तत्काल अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां आइसीयू में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने लगातार उपचार किया। तमाम प्रयासों के बावजूद सुधार नहीं हुआ और आखिकार बुधवार को उन्हें ब्रेनडेड घोषित कर दिया गया।

इस दुखद क्षण में अस्पताल की काउंसलिंग टीम के डॉ. अभिषेक बारोट ने परिजनों को अंगदान के महत्व के बारे में समझाया। गहरे सदमे के बावजूद पत्नी शांतिबेन ने पति के अंगदान की सहमति देकर मानवता की मिसाल पेश की। बाबूलाल के शरीर से एक लिवर और दोनों किडनी प्राप्त की गई हैं, जिन्हें सिविल मेडिसिटी परिसर स्थित किडनी अस्पताल भेजा गया है। इन अंगों का प्रत्यारोपण प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों में किया जाएगा।

243 ब्रेनडेड दाताओं से दान में मिले 803 अंग

सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि अस्पताल में अब तक ब्रेनडेड हो चुके 243 मरीज के 803 अंग दान में प्राप्त किए जा चुके हैं। इसके साथ ही अस्पताल में कुल अंग एवं ऊतक दान का आंकड़ा 1,042 तक पहुंच गया है। इनमें 239 ऊतक दान शामिल हैं, जिनमें 194 नेत्र और 45 त्वचा दान किए गए हैं।

हर माह 12 से 15 लोगों को मिल रहा नया जीवन

डॉ. जोशी ने बताया कि अस्पताल में हर माह औसतन तीन से पांच ब्रेनडेड दाताओं के माध्यम से 12 से 15 अंग विफलता से जूझ रहे मरीजों को नया जीवन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बाबूलाल डामोर के परिवार का यह निर्णय समाज के लिए एक प्रेरक संदेश है कि अंगदान मृत्यु का अंत नहीं, बल्कि कई जिंदगियों में नए सवेरे की शुरुआत भी बन सकता है।