-नाम बदलकर पुलिस को दे रहा था चकमा, 1994 में हत्या के मामले में हुई है आजीवन कैद की सजा, शहर में रह रहा था, परिजनों से भी बना ली थी दूरी
Ahmedabad. पेरोल पर छूटने के बाद 12 सालों से फरार चल रहे कैदी सतीश उर्फ भीखू रूपारेलिया को शहर क्राइम ब्रांच की टीम ने पकड़ा। पकड़ में नहीं आने के लिए वह अपने 85 वर्षीय बुजुर्ग पिता व सगी बहनों से अलग रहता था। साथ ही उनसे संपर्क भी नहीं करता था। उसने अपना नाम भी बदल लिया था। 1994 में शाहीबाग के नीलम होटल में हुई हत्या के मामले में पहले उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी। बाद में हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को उम्र कैद में बदल दिया था। यह सजायाफ्ता कैदी है वर्ष 2014 में पेरोल पर छूटने के बाद से फरार थे।
क्राइम ब्रांच के उपायुक्त अजीत राज्यान ने बताया कि पुख्ता सूचना मिलने के बाद लंबी जांच, निगरानी, फील्ड वर्क, तकनीकी अध्ययन के परिणाम के चलते आरोपी को पकड़ने में सफलता पाई। आरोपी न्यू राणिप इलाके में रहता था जो प्रहलादनगर क्षेत्र में फाइनेंस की ऑफिस शुरू कर फाइनेंस का कामकाज कर रहा था।
क्राइम ब्रांच के अनुसार सतीश रूपारेलिया ने 2017 में गजट प्रकाशित कराते हुए अपना नाम सतीश से बदलकर संजय रूपारेलिया कर लिया था। इस नाम के साथ ही यह न्यू राणिप के रत्नसागर हाइट्स में अपनी दूसरी पत्नी और दो बच्चों के साथ रह रहा था। उसे आसपास के लोग संजय के नाम से ही जानते हैं। इसके आपराधिक इतिहास के बारे में इसके बच्चों को कोई जानकारी नहीं है।
क्राइम ब्रांच के मुताबिक सतीश ने अपने अन्य साथी राजन पंचाल के साथ मिलकर 1994 में शाहीबाग के नीलम होटल में कालूपुर टंकशाल के कपड़ा व्यापारी अरविंद शाह की लूट के इरादे से हत्या कर दी थी। व्यापारी की पहचान नहीं हो इसके लिए उसका सिर धड़ से अलग कर अडालज क्षेत्र में फेंक दिया था। अरविंद की सोने की चेन, अंगूठी व उसके पास की नकदी लूट ली थी। इस मामले में आरोपी को पकड़ा गया। वर्ष 2000 में आरोपी व राजन को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। 2001 में हाईकोर्ट ने इस सजा को आजीवन कैद में बदल दिया। बताया जाता है कि इसके बाद 2004 में भी वह पेरोल पर छूटने के बाद 2008 तक फरार रहा था। उसे दरियापुर थाना क्षेत्र में नकली नोट मामले में पकड़ा गया था। इस मामले में उसे पांच साल की सजा भी हुई थी।