11 वर्षों में 60 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने निजी स्कूल छोड़ सरकारी स्कूलों में लिया प्रवेश
अहमदाबाद शहर के सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए लोगों का रुझान बढ़ता नजर आ रहा है। मनपा संचालित 25 स्कूलों में वर्ष 2025-26 में प्रवेश के लिए बच्चों व अभिभावकों की भीड़ लगी हुई है। ऐसे में प्रतीक्षा सूची भी जारी करनी पड़ी है। पिछले 11 वर्षों में लगभग 60 हजार विद्यार्थी निजी स्कूलों को छोड़ सरकारी स्कूलों प्रवेश लिया है।अहमदाबाद में आमतौर पर निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए लोगों की भीड़ देखी जाती है, लेकिन अब सरकारी स्कूलों के प्रति भी लोगों का नजरिया बदलता नजर आ रहा है। शायद यही कारण है कि इन दिनों प्राथमिक स्कूलों में प्रवेश के लिए लंबी कतार देखी जा रही हैं। थलतेज स्थित अनुपम स्कूल नंबर दो में भी प्रवेश के लिए अभिभावकों की भीड़ देखी गई। भारी भीड़ के कारण प्रतीक्षा सूची जारी की गई है। यही हाल अहमदाबाद मनपा संचालित 24 अन्य स्कूलों का है। इनमें घाटलोडिया , साबरमती, थलतेज, जोधपुर, एलिसब्रिज, नारणपुरा, असारवा, बापूनगर, नरोडा, अमराईवाड़ी, मणिनगर, वटवा, बेहरामपुरा, निकोल, वस्त्राल, दाणीलीमडा, दरियापुर, मोटेरा, ठक्करबापानगर इलाकों के स्कूल भी शामिल हैं।
नगर प्राथमिक शिक्षा समिति की ओर से वर्ष 2025-26 के लिए किए नामांकन सर्वे के तहत बालवाटिका में प्रवेश के लिए बच्चों की संख्या 8255 तथा पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 1501 है। इस तरह से कुल 9765 बच्चे प्रवेश के पात्र हैं।
सरकारी स्कूलों में नर्सरी से लेकर उच्च प्राइमरी शिक्षा तक समय के साथ-साथ परिवर्तन हो रहा है। स्कूलों में शिक्षा के साथ-साथ अन्य सुविधाएं मिलने से यह बदलाव देखा जा रहा है। न सिर्फ शहरों बल्कि गांवों में भी यह बदलाव देखा जा रहा है। यही कारण है कि लोग निजी स्कूलों या अन्य स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में जा रहे हैं। थलतेज अनुपम (स्मार्ट) प्राथमिक स्कूल में वर्ष 2024-25 में 62 छात्रों ने निजी स्कूलों से आकर दाखिला लिया था। वर्ष 2023-24 में 79 और वर्ष 2022-23 में 44 ने प्रवेश लिया था।
अहमदाबाद मनपा स्कूल के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. एल.डी. देसाई के अनुसार राज्य सरकार की शिक्षा-उन्मुख योजनाएं जैसे नमो लक्ष्मी योजना, नमो सरस्वती योजना आदि का लाभ भी इन स्कूलों में मिलता है। इसके अलावा स्मार्ट स्कूल, अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब, विज्ञान प्रयोगशालाएं, और बुनियादी सुविधाओं में वृद्धि से अभिभावकों का विश्वास बढ़ा है।