
Ahmedabad. आरटीओ चालान, गैस बिल अपडेट, बैंक केवाइसी के नाम की एपीके (एंड्रॉयड पैकेट किट) फाइल भेजकर देशभर के लोगों के बैंक खातों से नकदी पार करने वाले शातिर गिरोह का शहर पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच टीम ने पर्दाफाश किया। झारखंड के जामताड़ा गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों को पकड़ा। इसमें से मुख्य आरोपी को चलती ट्रेन से पकड़ने में सफलता पाई।
साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार पकड़े गए तीनों आरोपी झारखंड के गिरिडीह जिले के मूल निवासी हैं। इनमें मुख्य आरोपी पूर्नानंद उर्फ मुकेश तिवारी (28) फिलहाल मुंबई के आगरवाडी गांव में रहता है जो 10वीं तक पढ़ा है। विकास दास (33) ने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की है वहीं सीताराम मंडल (26) आठवीं कक्षा तक पढ़ा है।
साइबर क्राइम ब्रांच की टीम ने इस गिरोह के मुख्य आरोपी पूर्नानंद को कोलकाता से साईरंग जाने वाली चलती ट्रेन से आरपीएफ की मदद से पकड़ा। इसके बाद विकास और सीताराम को भी गिरफ्तार किया। विकास के विरुद्ध उत्तर प्रदेश में दो, पूर्नानंद के विरुद्ध झारखंड में एक और सीताराम के विरुद्ध झारखंड में तीन मामले पहले से दर्ज हैं।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि पूर्नानंद ने एपीके फाइल डेवलप करने के बाद उसे टेलीग्राम पर एक बोट के जरिए उपलब्ध कराया था। इन्हें खरीदने वाले 400 लोगों की जानकारी इसके मोबाइल से मिली है। आरोपी 12 से 13 हजार रुपए में एपीके फाइल बेचता था। एपीके फाइल बोट की लिंक इसने विकास और सीताराम को दी थी। ये भी अन्य लोगों को एपीके फाइल बेचते थे। इसे जो व्यक्ति डाउनलोड करता था, उनके मोबाइल कोन्टैक्ट में शामिल सभी लोगों के वॉट्सएप, टेलीग्राम व एन्य प्लेटफॉर्म पर स्वत: इसकी लिंक चली जाती थी। इसमें से जो डाउनलोड करता उनके भी कॉन्टैक्ट लिस्ट वालों को लिंक जाती थी। ऐसे में लाखों लोगों को एक ही दिन में लिंक चली जाती थी।
आरोपी ने एसबीआइ केवाइसी, एसबीआइ रिवॉर्ड, आरटीओ, बीओआइ, बीओबी, इंडियन ओवरसीज, यूनियन, यश, सीबीआइ, बिल, सिटी यूनियन, एसबीआइ फर्स्ट लास्ट गार्ड छह डिजिट, एक्सिस, फेडरल, बीएसईएस बिल अपडेट, महावितरण, इंडसइंड, सारस्वत नाम से एपीके फाइल बनाकर टेलीग्राम बोट में ऑप्शन दिए थे।
एपीके फाइल खरीदने के लिए जैसे ही व्यक्ति नंबर डालते उस नाम की एपीके लिए पेमेंट का ऑप्शन आता था। आरोपी योनो कैश एप से पेमेंट लेते थे। इसकी जानकारी पूर्नानंद विकास को देता था। विकास एसबीआइ के एटीएम में जाकर योनो कैश की सुविधा का उपयोग कर नकदी निकाल लेता था। उसे अपना कमीशन काटने के बाद पूर्नानंद को मुंबई भेज देता था। सीताराम भी एपीके फाइल लेकर अन्य आरोपियों को भेजता।
गिरोह ने अहमदाबाद के हांसोल क्षेत्र में रहने वाले नरेश देवानंद से 6.68 लाख रुपए ठगे। आरोपियों ने नरेश को साबरमती गैस लिमिटेड के नाम से गैस कनेक्शन बंद होने का मैसेज भेजा। फिर गैस कंपनी अधिकारी बनकर बिल अपडेट करने के लिए साबरमती गैस बिल अपडेट नाम से एपीके फाइल भेजकर उसे डाउनलोड करवाया। उसके बाद मोबाइल का एक्सेस पा लिया और उनके एचडीएफसी बैंक खाते से 6.68 लाख रुपए के ट्रांजेक्शन कर लिए।
इन आरोपियों के विरुद्ध साइबर क्राइम ब्रांच में एपीके फाइल भेजकर ठगी करने के 12 मामले दर्ज हैं। इसमें दो मामलों में 15 लाख, दो में 10 लाख, एक में 11.87, अन्य में 11.25 लाख, दो में 5.19 लाख अन्य एक में 9.99 लाख रुपए की ठगी का आरोप है।