
Ahmedabad. केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार शाम को गुजरात विद्यापीठ के 72वें दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि पद से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में बहुत से महापुरुषों को पढ़ा, समझा और उनके विचारों को आत्मसात किया। लेकिन महात्मा गांधी का संदेश उस समय भी प्रासंगिक था, आज भी है और आने वाले 100 वर्षों तक प्रासंगिक रहेगा। उन्होंने कहा कि गांधी का संदेश पूरी दुनिया को कल्याण का मार्ग दिखाता है। भारतीय जीवन-पद्धति, भारतीय मूल्य और परंपराएं ही गांधी के संदेश का मूल आधार हैं, इसलिए यह कभी अप्रासंगिक नहीं होगा।
शाह ने कहा कि आज गुजरात विद्यापीठ से 900 विद्यार्थी उपाधि और 11 गोल्ड मेडल लेकर निकल रहे हैं। उन्हें आगे चलकर कई पारिवारिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना होगा, पर नित्य साधना और स्वाध्याय से समाधान निकलेगा।शाह ने कहा कि गांधी का मानना था कि स्वाधीनता तब तक अधूरी है, जब तक हमारी भाषा, संस्कृति, श्रम और उद्देश्य राष्ट्रहित से जुड़े न हों। उनका मानना था कि स्वभाषा नहीं है तो स्वराज कभी मिल ही नहीं सकता। हमारा धर्म, हमारी संस्कृति से अगर हम जुड़े हुए नहीं हैं तो स्वतंत्रता का कोई मतलब नहीं है। अगर हमारा श्रम और हमारा उद्देश्य, हमारे देश के साथ जुड़ा हुआ नहीं है तो स्वतंत्रता मिलने पर भी हम उसकी रक्षा नहीं कर पाएंगे।
गृह मंत्री ने कहा कि ऐसी शिक्षा हो, जो हाथों को कौशल दे, हृदय में संवेदनशीलता जगाए और मस्तिष्क को ज्ञान के साथ विवेक अपनाने के लिए खोले। केवल ज्ञान से भरा मस्तिष्क अहंकार को जन्म देता है, लेकिन ज्ञान और विवेक से युक्त मस्तिष्क विनम्रता और विद्वत्ता का विकास करता है।
समारोह में दीक्षांत भाषण देते हुए विद्यापीठ के कुलाधिपति और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने गुरुकुल परंपरा, वेद-उपनिषद के आदर्शों और महात्मा गांधी के मूल्यों पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने दीक्षांत समारोह का महत्व समझाते हुए कहा कि यह क्षण शिक्षा प्राप्त करने के बाद समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को स्वीकार करने का एक अविस्मरणीय क्षण है। डिजिटल युग का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने युवाओं से सोशल मीडिया पर सत्य और असत्य के विवेक को पहचानने का अनुरोध किया। समारोह के प्रारंभ में गुजरात विद्यापीठ के कुलपति डॉ. हर्षद पटेल ने गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। इस दौरान कई विवि के कुलपति, विधायक, बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।