
Ahmedabad. कारोबारियों के लिए व्यापार को आसान बनाने और टैक्स प्रक्रिया को सुगम करने के उद्देश्य से हाल ही में किए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों को 1 नवंबर से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जिन बदलावों-सुधारों के लिए कानून में संशोधन की आवश्यकता है, ऐसे सुधार 1 अप्रेल 2027 से प्रभावी होने की उम्मीद है। यह जानकारी केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआइसी) के जीएसटी सदस्य संजय मंगल ने गुरुवार को अहमदाबाद में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए गए फैसले मुख्य रूप से प्रक्रियात्मक और संरचनात्मक सुधारों पर केंद्रित हैं, जिससे करदाताओं पर अनुपालन का बोझ कम हो सके, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का प्रवाह सुधरे और रिफंड प्रक्रिया आसान बने। जहां अधिनियम में संशोधनों की आवश्यकता नहीं है, उन्हें जल्द से जल्द लागू किया जाएगा। अनुमान के मुताबिक, ये सुधार 1 नवंबर से शुरू हो जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिस्टम में होने वाले बदलावों की जरूरत के आधार पर इन सुधारों को चरणों में लाया जाएगा। जिन उपायों के लिए केंद्रीय और राज्य जीएसटी कानूनों में संशोधन जरूरी है, उन्हें आवश्यक विधायी बदलावों के बाद लागू किया जाएगा, जिसके लिए काउंसिल ने 1 अप्रेल, 2027 का लक्ष्य तय किया है। पंजीकरण, रिफंड से जुड़े सुधार नवंबर से लागू हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जिन बदलावों में कानून में संशोधन होना है, उनमें गिरफ्तारी के प्रावधानों में बदलाव, अभियोजन की सीमा को बढ़ाने एवं उसका युक्तसंगतीकरण। ई-वे बिल के प्रावधानों में संशोधन। अन्य आपराधिक प्रक्रियाओं से जुड़े सुधार के लिए कानून में संशोधन जरूरी है। नोटिस जारी करने को न्यूनतम सीमा का निर्धारण से जुड़े सुधार के लिए केन्द्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को कानून में संशोधन करना होगा। ऐसे में यह अप्रेल 2027 से लागू करने की योजना है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि पहले की जा चुकी गिरफ्तारियां इससे प्रभावित नहीं होंगी। नए प्रावधानों के लागू होने तक इस पर दिशा-निर्देशों पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सीबीआइसी बाद में कार्रवाई करने के बजाय फर्जी इनवॉइस और फर्जी आइटीसी दावों के सृजन को रोकने के लिए प्रौद्योगिकी-संचालित जांच पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। काउंसिल ने रिटर्न दाखिल करने के तंत्र में संशोधन करने का निर्णय लिया है, ताकि सप्लायर द्वारा भुगतान के रूप में घोषित टैक्स, जिसे प्राप्तकर्ता को आइटीसी के रूप में पास ऑन किया जाता है, उसका भुगतान करना अनिवार्य हो सके। इस जांच से यह सुनिश्चित होगा कि शुरुआत में ही फर्जी इनवॉइस और फर्जी आइटीसी न बन सकें, जिससे गिरफ्तारियों जैसी बाद की कार्यवाहियों के बजाय स्रोत पर ही धोखाधड़ी रोकने पर जोर रहेगा।
उन्होंने बताया कि काउंसिल ने केवल बिजनेस-टू-कन्ज्यूमर (बीटूसी) आपूर्ति करने वाले और 5 करोड़ से कम टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए एक नए रिटर्न दाखिल करने के तंत्र को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, पात्र व्यापारी सालाना रिटर्न दाखिल कर सकेंगे और त्रैमासिक आधार पर कर भुगतान कर पाएंगे। 5 करोड़ तक के टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों को अपनी नियत तारीख वाले महीने के भीतर ही रिटर्न दाखिल करने पर देरी होने के बाद भी कोई लेट फीस नहीं चुकानी होगी।