
Ahmedabad. गरबा आयोजनों के फर्जी पास बनाकर सोशल मीडिया के जरिए लोगों को बेचकर शातिर आरोपियों ने 8 लाख रुपए ठगे होने का खुलासा हुआ है। एक गरबा आयोजक की ओर से साइबर क्राइम ब्रांच थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने पर साइबर क्राइम ब्रांच की टीम ने मुख्य आरोपी सहित दो लोगों को राजस्थान के सीकर से पकड़ा।
आरोपियों की पूछताछ में सामने आया कि शातिर आरोपियों ने चैटजीपीटी की मदद से गरबों के फर्जी पास, टिकट और उनके क्यूआर कोड तैयार किए थे। इंस्टाग्राम का इस्तेमाल कर 686 फर्जी पास बेचकर लोगों से लगभग आठ लाख रुपए ऐंठे थे। अब तक 13 आयोजनों के फर्जी पास बेचने की जानकारी सामने आई है। आरोपियों ने 19 अगस्त से 14 अक्टूबर के बीच वीर राजपूत नाम की इंस्टाग्राम आइडी बनाकर एक गरबा आयोजक के नाम और लोगो का दुरुपयोग किया। कंपनी से मिलता-जुलता नकली ईमेल आइडी बनाकर इंस्टाग्राम पर गरबा टिकट डिस्काउंट में बेचने के बहाने लोगों से पैसे ऐंठे।
जांच में सामने आया कि आरोपी पेशेवर तरीके से फर्जी इंस्टाग्राम आइडी चलाता था। मेटा विज्ञापनों के माध्यम से पेड विज्ञापन देकर खास इलाकों के लोगों को टार्गेट करता था। उसकी पोस्ट को शहर के करीब 40,000 लोगों ने देखा था। आरोपी इवेंट मैनेजमेंट के काम से जुड़ा होने के कारण चैटजीपीटी की मदद से विभिन्न गरबा आयोजनों के बारकोड और क्यूआर कोड वाले प्रोफेशनल दिखने वाले नकली पास तैयार करता था। फिर व्हाट्सएप पर 'वीर राजपूत' बनकर चैट करता और ग्राहकों का भरोसा जीतने के बाद म्यूल खातों के जरिए पैसे ट्रांसफर करवाता था। खास बात यह है कि सांतेज थाने में मामला दर्ज होने की जानकारी होने के बावजूद आरोपी जोधपुर, बीकानेर और सीकर जैसी जगहों पर रहकर फर्जी पास बेचने का सिलसिला जारी रखे हुए थे।
पकड़े गए आरोपियों में वीरेंद्र सिंह राठौड़ (21) मूल रूप से राजस्थान के जोधपुर जिले की फलोदी तहसील के ढेलाना कनोतोकी ढाणी का निवासी है। वह वर्तमान में जोधपुर के सैनिकपुरी स्थित बालाजीनगर में रहता है और उसने अहमदाबाद की सिल्वर ओक यूनिवर्सिटी से बीबीए की पढ़ाई की है। उसके खिलाफ 3 अक्टूबर को गांधीनगर के सांतेज पुलिस थाने में भी मामला दर्ज हुआ है। दूसरा आरोपी किशनसिंह राठौड़ (22 ) जोधपुर जिले की डेचू तहसील के खेडा बागोडिया मंडला कला गांव का रहने वाला है जिसने बीएससी की पढ़ाई की है।