अहमदाबाद शहर के सिविल मेडिसिटी कैंपस स्थित गुजरात कैंसर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (जीसीआरआइ) में ब्रेन ट्यूमर के चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। जीसीआरआइ में पिछले पांच सालों में औसतन हर साल 250 से अधिक नए मरीज दर्ज किए गए हैं। इनमें पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में लगातार अधिक रही है। विशेषज्ञों के अनुसार आनुवांशिक बदलाव, परिवारिक इतिहास, लंबे समय तक रेडिएशन एक्सपोज़र, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रमुख कारण हैं।
अहमदाबाद शहर के सिविल मेडिसिटी कैंपस स्थित गुजरात कैंसर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (जीसीआरआइ) में ब्रेन ट्यूमर के चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। जीसीआरआइ में पिछले पांच सालों में औसतन हर साल 250 से अधिक नए मरीज दर्ज किए गए हैं। इनमें पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में लगातार अधिक रही है। विशेषज्ञों के अनुसार आनुवांशिक बदलाव, परिवारिक इतिहास, लंबे समय तक रेडिएशन एक्सपोज़र, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रमुख कारण हैं।
विश्व स्तर पर हर साल लगभग 3.21 लाख नए ब्रेन ट्यूमर के मरीज सामने आते हैं और औसतन 2.48 लाख मौतें होती हैं। भारत में भी स्थिति गंभीर है, जहां हर साल लगभग 32,574 नए मामले और 27,990 मरीजों की मौत हो जाती है।इन लक्षणों को न लें हल्के में
जीसीआरआइ के निदेशक डॉ. शशांक पंड्या का कहना है, कि लगातार सिरदर्द, अचानक दौरे, याददाश्त और एकाग्रता में कमी, दृष्टि या सुनने की स्थिति में बदलाव, बार-बार उल्टी, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी और संतुलन बिगड़ना जैसे लक्षण नजरअंदाज न करें।
समय पर जांच और निदान जीवन बचा सकता है। उनके अनुसार ब्रेन ट्यूमर के लिए आनुवंशिक बदलाव, पारिवारिक इतिहास, लंबे समय तक रेडिएशन एक्सपोज़र, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, औद्योगिक रसायनों का संपर्क और कुछ वायरल संक्रमण प्रमुख जोखिम कारक हो सकते हैं। ब्रेन ट्यूमर खास कर ब्रेन कैंसर जल्दी निदान और सही इलाज ही जीवन बचाने की सबसे बड़ी कुंजी है।
आधुनिक उपचार की सुविधा:जीसीआरआइ में एमआरआइ , सीटी स्कैन और स्टिरियोटैक्टिक बायोप्सी जैसी अत्याधुनिक जांच उपलब्ध हैं। उपचार में सर्जरी, रेडिएशन, कीमोथेरेपी के साथ टार्गेटेड और इम्यूनोथेरापी जैसी आधुनिक तकनीकें मौजूद हैं। संस्थान में साइबर नाइफ, नेविगेशन सिस्टम और इंट्राऑपरेटिव इमेजिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जो कैंसर की जांच और उपचार के लिए आज के जमाने में अहम हैं।
डॉ. पंड्या के अनुसार जीसीआरआइ का लक्ष्य मरीजों को एक ही छत के नीचे विश्वस्तरीय निदान और पूरी उपचार सुविधा प्रदान करना है। आर्थिक कठिनाइयां उपचार में बाधा न बने, इसके लिए पात्र मरीजों को आयुष्मान भारत और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत मुफ्त इलाज दिया जाता है।
जीसीआरआइ में साल-दर-साल ब्रेन ट्यूमर के केस
2021- 174 -105- 279
2022- 171 -104- 275
2023- 175- 98- 273
2024- 150- 98 -248
2025 -149- 103- 252