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मानसिक रोगियों में हाइ बीपी बना जानलेवा, 21 साल में 15 गुना बढ़ीं मौतें

मानसिक और व्यवहार संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों में उच्च रक्तचाप (हाइ बीपी) तेजी से जानलेवा साबित हो रहा है। विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर सामने आए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह गंभीर तथ्य उजागर हुआ है कि वर्ष 1999 से 2020 के बीच मानसिक रोगियों में उच्च रक्तचाप से जुड़ी मौतों की संख्या 1749 से बढ़कर 26922 तक पहुंच गई। यानी 21 वर्षों में मौतों में लगभग 15 गुना वृद्धि दर्ज की गई।

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World Hypertension Day

एआइ फोटो।(AI)

Ahmedabad news : मानसिक और व्यवहार संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों में उच्च रक्तचाप (हाइ बीपी) तेजी से जानलेवा साबित हो रहा है। विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर सामने आए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह गंभीर तथ्य उजागर हुआ है कि वर्ष 1999 से 2020 के बीच मानसिक रोगियों में उच्च रक्तचाप से जुड़ी मौतों की संख्या 1749 से बढ़कर 26922 तक पहुंच गई। यानी 21 वर्षों में मौतों में लगभग 15 गुना वृद्धि दर्ज की गई। यह कहा जा सकता है कि अन्य बीमारियों से जूझने वाले मरीजों में ही नहीं मानसिक रूप से बीमार मरीजों में भी यह समस्या काफी चिंता का विषय है।

अमेरिका के सीडीसी वंडर डाटाबेस पर आधारित यह अध्ययन प्रतिष्ठित चिकित्सा शोध पत्रिका हाइपरटेंशन जर्नल में प्रकाशित हुआ है। “मेंटल एंड बिहेवियरल डिसऑर्डर्स में मृत्यु का कारण बन रहा हाइपरटेंसिव रोग” विषय पर प्रकाशित इस शोध में अहमदाबाद स्थित यू एन मेहता हॉस्पिटल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कमल शर्मा भी शामिल हैं। इस शोध के बारे में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। उनके अनुसार उच्च रक्तचाप मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए घातक हो रहा है। यह चिंता का विषय है।

बढ़ता तनाव, अवसाद, अनियमित जीवनशैली प्रमुख कारण

डॉ. शर्मा के अनुसार मानसिक रोगों से जूझ रहे मरीजों में उच्च रक्तचाप की समय पर पहचान और उपचार नहीं होने से हृदय, गुर्दे और मस्तिष्क संबंधी जटिलताएं तेजी से बढ़ रही हैं। बढ़ता तनाव, अवसाद, अनियमित जीवनशैली और उपचार में देरी इस गंभीर स्थिति के प्रमुख कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और हृदय रोग उपचार को एकीकृत करने की आवश्यकता है, ताकि समय रहते जोखिम को कम किया जा सके।इसके लिए समय समय पर जांच करने की आवश्यकता है।

अध्ययन में पाया गया कि मानसिक रोगियों में गुर्दा विफलता के साथ उच्च रक्तचाप संबंधी किडनी रोग से होने वाली मौतों में सबसे अधिक 33.34 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि हुई। वहीं, हृदय विफलता (हार्ट फेल्योर) के साथ उच्च रक्तचाप संबंधी हृदय रोग में 14.59 प्रतिशत तथा सामान्य उच्च रक्तचाप से होने वाली मौतों में 12.16 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। ये आंकड़े बताते हैं कि उच्च रक्तचाप कितना घातक है।

ज्यादा आयु वाले मरीजों में और घातक

पुरुषों में यह वृद्धि महिलाओं की तुलना में अधिक रही, जबकि 85 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित पाए गए। कुल मिलाकर यह समस्या बुजुर्गों को और घातक सिद्ध हो रही है। इसके लिए सतर्कता की जरूरत है।