अहमदाबाद

पहली बार जर्मनी के चांसलर साबरमती आश्रम आएंगे, पीएम मोदी रहेंगे साथ

-साबरमती आश्रम में दोनों राष्ट्राध्यक्षों के आगमन के चलते तैयारी जोरों पर, सुरक्षा के कड़े इंतजाम, आगंतुकों के लिए खुला रहेगा आश्रम

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अहमदाबाद के साबरमती आश्रम के बाहर जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के स्वागत को लगा होर्डिंग।

Ahmedabad. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कर्मभूमि साबरमती आश्रम एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का साक्षी बनने जा रही है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज पहली बार साबरमती आश्रम का दौरा करेंगे। यह ऐतिहासिक यात्रा 12 जनवरी को सुबह करीब 9 से 9:30 बजे के बीच होगी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके साथ मौजूद रहेंगे। वर्ष 2026 की शुरुआत में ही दो राष्ट्राध्यक्षों का एक साथ साबरमती आश्रम आगमन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व रखता है।

साबरमती आश्रम से जुड़े एक पदाधिकारी के अनुसार जर्मनी के इतिहास में यह पहला अवसर होगा जब कोई जर्मन चांसलर गांधीजी की कर्मस्थली पहुंचेगा। आश्रम पहुंचने के बाद दोनों राष्ट्राध्यक्ष महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद वे प्रार्थना स्थल होते हुए हृदय कुंज जाएंगे, जहां चांसलर मर्ज गांधीजी के तैलचित्र पर सूत की आंटी (माला) अर्पित करेंगे।

चरखे पर हाथ आजमाएंगे जर्मन चांसलर

हृदय कुंज में चांसलर मर्ज चरखा चलाने का भी अनुभव लेंगे और अपने विचार आगंतुक पुस्तिका में दर्ज करेंगे। इस दौरान साबरमती आश्रम शाला के बच्चों द्वारा प्रार्थना प्रस्तुत की जाएगी। बच्चों के साथ प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर स्मृति-चित्र भी खिंचवाएंगे। इसके बाद दोनों नेता साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भाग लेने के लिए रवाना होंगे।

सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त, ग्रीन रूम तैयार

इस महत्वपूर्ण दौरे को देखते हुए साबरमती आश्रम में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और सुरक्षा व्यवस्था की रिहर्सल भी हो चुकी है। दोनों राष्ट्राध्यक्षों के लिए हृदय कुंज के पीछे ग्रीन रूम तैयार किया जा रहा है। दौरे के दौरान राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी उपस्थित रहेंगे।

आगंतुकों के लिए खुला रहेगा आश्रम

आश्रम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 12 जनवरी को भी साबरमती आश्रम आम आगंतुकों के लिए खुला रहेगा। सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए आसपास की ट्रैफिक व्यवस्था रोकी जा सकती है, लेकिन आश्रम के द्वार बंद नहीं किए जाएंगे। साबरमती आश्रम हर दिन खुला रहता है।साबरमती आश्रम में होने वाला यह ऐतिहासिक दौरा न केवल भारत-जर्मनी संबंधों को नई मजबूती देगा, बल्कि गांधीजी के विचारों को वैश्विक मंच पर एक बार फिर केंद्र में लाएगा।

Published on:
11 Jan 2026 09:44 pm
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