
Ahmedabad. गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से राज्य की अनुदानित स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के गठन को लेकर नए नियम और निर्णय को लेकर विरोध शुरू हो गया है। राज्य स्कूल संचालक महामंडल ट्रस्ट ने इस संबंध में सभी अनुदानित स्कूल संचालकों को पत्र लिखा है। इसमें सरकार के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए इसे ट्रस्ट संचालित शिक्षण संस्थाओं के अधिकारों के विपरीत बताया है। इस विषय पर विस्तृत चर्चा कर सरकार के समक्ष अपनी आपत्तियां और सुझाव रखने का ट्रस्ट ने निर्णय किया है।
ट्रस्ट की ओर से गुरुवार को स्कूल संचालकों को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने मई में स्कूल प्रबंधन समिति के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके आधार पर गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग ने गत 5 मई को अनुदानित स्कूलों में एसएमसी गठन संबंधी आदेश जारी किया है।इसके तहत प्रत्येक अनुदानित स्कूल में एसएमसी का गठन अनिवार्य है। छात्र संख्या के आधार पर समिति में 12 से 25 सदस्य होंगे, जिनमें अभिभावक, स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि, शिक्षक, शिक्षा विशेषज्ञ, विद्यालय के पूर्व विद्यार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य सचिव के रूप में शामिल रहेंगे।
ट्रस्ट ने कहा कि गुजरात की अधिकांश अनुदानित स्कूलें पहले से ही मुंबई पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट एक्ट-1950 अथवा सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट-1860 के तहत पंजीकृत सार्वजनिक संस्थाओं की ओर से संचालित हैं। इन संस्थाओं का संचालन पब्लिक ट्रस्ट रजिस्टर (पीटीआर) में दर्ज ट्रस्टियों की ओर से किया जाता है। ऐसे में नई एसएमसी व्यवस्था लागू होने से ट्रस्ट के प्रशासनिक अधिकार और निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो सकते हैं।
ट्रस्ट का कहना है कि विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, शिक्षकों की उपस्थिति, समय पर पाठ्यक्रम पूरा कराने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के पालन की जिम्मेदारी पहले से ही ट्रस्ट निभा रहे हैं। एसएमसी को वित्तीय अधिकार, बैंक खाते के संचालन तथा सूचना प्राप्त करने का अधिकार दिए जाने से प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
राज्य स्कूल संचालक महामंडल ट्रस्ट के अध्यक्ष भास्कर पटेल ने कहा कि इस मुद्दे पर सभी जिला स्कूल संचालक मंडल जिला स्तर पर तत्काल बैठक आयोजित करेंगे। उसमें विस्तृत चर्चा करने के बाद, जिलों की आपत्तियां और मांगें मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री तक पहुंचाएंगे।