
Ahmedabad. गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की ओर से गिरफ्तार किए गए प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आठ संदिग्ध लोगों की पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। प्राथमिक जांच में पता चला कि आरोपियों ने जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा को गुजरात में फैलाने के लिए दारुल इस्लाम गुजरात जैश-ए-मोहम्मद नाम से नया संगठन (तंजीम) बनाया है। इस संगठन के मुख्य आरोपी इब्राहिम मो.हुसैन घघा और अहमद गाजीवाला हैं वहीं अन्य सभी सदस्य हैं। बीते करीब छह महीने से इस संगठन की स्थापना के अब तक की जांच में सबूत हाथ लगे हैं।
गुजरात एटीएस के उप महानिरीक्षक (डीआइजी) सुनील जोशी ने बताया कि प्राथमिक जांच में पता चला कि आरोपी काफी कट्टर सोच के हैं। इन्होंने जो दारुल इस्लाम गुजरात जैश-ए-मोहम्मद नाम का, जो नया संगठन बनाया है, उसमें अब तक सिर्फ आठ ही सदस्य बनाए हैं। इन आठों लोगों को एटीएस ने पकड़ने में सफलता पाई है। आरोपी इस नए संगठन से जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा को गुजरात में प्रचारित करने काम कर रहे थे। यह सिर्फ उसी व्यक्ति को संगठन का सदस्य बनाते थे, जिन पर इन्हें पूरी तरह से विश्वास हो जाए कि वह व्यक्ति पुलिस को कोई जानकारी नहीं देगा और पूरी तरह से उनके बताए रास्ते पर चलेगा।
यही वजह है कि इसमें जो सदस्य हैं, वे आपस में संबंधी हैं। या फिर मदरसे से जुड़े हैं। इसमें अहमद गाजीवाला, मुदस्सिर गाजीवाला सगे भाई हैं। इब्राहिम मो.हुसैन घघा इनका मामा है। जकरिया दुरानी, बिलाल दुरानी भी सगे भाई हैं। सिद्धपुर के खडियासणा गांव स्थित जामिया अबुल हसन मदरसा का मुफ्ती फैजान और मदरसे में रहने वाला मो.अमीन शेरा व जकरिया शामिल हैं।इसके अलावा आरोपियों ने जैश और मसूद अजहर से जुड़े जेहादी साहित्य को गुजरात में प्रचारित करने के लिए उर्दू भाषा से उसका गुजराती भाषा में अनुवाद भी किया है। यह कार्य मुख्य रूप से इब्राहिम मो.हुसैन घघा और जकरिया दुरानी ने किया है। इन्होंने मसूद अजहर की उर्दू की पुस्तक दर्स ए जेहाद का गुजराती में अनुवाद किया है। अहमद और इब्राहिम ने अपने हाथों से जैश का झंडा भी बनाया है।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि इस संगठन से जुड़े सभी सदस्य आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक आतंकी मसूद अजहर व उसकी विचारधारा से प्रेरित थे। ये सभी उसके वीडियो को सुनते, साहित्य को लंबे समय से पढ़ रहे थे। आरोपियों की ओर से मसूद को संबोधित करते हुए उर्दू भाषा में टाइप किए गए आठ पत्र भी मिले हैं, जिसमें इन्होंने आतंकी संगठन से जुड़ने के बारे में लिखा है।
प्राथमिक जांच में पता चला कि गिरोह से जुड़े आठों सदस्य अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी अकाउंट बनाकर सक्रिय थे। इसमें वॉट्सएप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम एवं नोर्ड लॉकर नाम की एप्लीकेशन शामिल है। इनके जरिए यह कट्टर विचारधारा से जुड़े साहित्य, वीडियो, फोटो को साझा भी करते थे। सीमा पार और आपस में संपर्क में भी रहते थे।