3 जुलाई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पुत्र को खोने के गम के बीच मां ने लिया अंगदान का फैसला, छह लोगों को मिल सकेगा नया जीवन

अस्पताल में अब तक ब्रेन डेड घोषित 245 मरीजों के परिजनों ने अंगदान की सहमति दी है। इनके 1,054 अंगों और ऊतकों का दान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णय न केवल कई मरीजों को नया जीवन देते हैं, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति विश्वास और जागरूकता भी बढ़ाते हैं।
2 min read
Google source verification
Ahmedabad civil hospital Organ Donation

ब्रेनडेड मरीज के पास परिजन और चिकित्साकर्मी।

Ahmedabad news: बेटे को खोने का दर्द शायद दुनिया का सबसे बड़ा होता है, लेकिन उसी असहनीय पीड़ा के बीच शहर में हांसोल निवासी भारतीबेन खुशलाणी ने ऐसा निर्णय लिया, जिसने छह अनजान लोगों के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी जगा दी। सड़क हादसे में ब्रेन डेड घोषित हुए उनके 39 वर्षीय पुत्र कमलेश खुशलाणी के अंगदान की सहमति देकर उन्होंने मानवता की मिसाल पेश की।कमलेश गत 28 जून को एयरपोर्ट रोड पर सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

उन्हें 108 एम्बुलेंस से अहमदाबाद के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने 72 घंटे से अधिक समय तक लगातार उपचार किया। तमाम प्रयासों के बावजूद गुरुवार को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसके बाद अस्पताल की अंगदान टीम ने परिजनों को अंगदान का महत्व समझाया। पत्नी के नहीं होने के कारण अस्पताल में मौजूद उनकी मां भारतीबेन ने मानवता को सर्वोपरि रखते हुए बेटे के अंगदान की सहमति दे दी।

जन्म से थी एक ही किडनी

सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी के अनुसार अंगदान के तहत एक लिवर, एक किडनी, एक पैंक्रियाज, दोनों कॉर्निया और त्वचा दान की गई। इनमें लीवर का प्रत्यारोपण सूरत के एक मरीज में किया जाएगा, जबकि किडनी और पैंक्रियाज का प्रत्यारोपण अहमदाबाद सिविल मेडिसिटी परिसर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजीज एंड रिसर्च सेंटर (आइकेडीआरसी) में भर्ती मरीजों को नया जीवन देगा। दोनों कॉर्निया से दो लोगों की आंखों की रोशनी लौटेगी, वहीं त्वचा का उपयोग झुलसे मरीजों के उपचार में किया जाएगा। डॉ. जोशी ने बताया कि ब्रेन डेड हुए कमलेश के जन्म से ही एक किडनी थी, जबकि सामान्यतः व्यक्ति के शरीर में दो किडनी होती हैं।

सिविल अस्पताल में अब तक 245 ब्रेन डेड मरीजों के अंगदान की सहमति

डॉ. जोशी ने बताया कि इस अंगदान के साथ अस्पताल में अब तक ब्रेन डेड घोषित 245 मरीजों के परिजनों ने अंगदान की सहमति दी है। इनके 1,054 अंगों और ऊतकों का दान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णय न केवल कई मरीजों को नया जीवन देते हैं, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति विश्वास और जागरूकता भी बढ़ाते हैं। शुक्रवार को अस्पताल में भावुक माहौल रहा। परिवार के 30 से अधिक सदस्य अंतिम विदाई के लिए मौजूद थे। आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बात का संतोष भी था कि कमलेश के अंग कई लोगों के शरीर में जीवित रहेंगे।