राज्य के योजना ढांचे में मूलभूत परिवर्तन लाने की सिफारिश, विकेन्द्रित योजना व्यवस्था को अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्व आधारित, जनकेन्द्रित बनाने का सुझाव
Ahmedabad. गुजरात सरकार के प्रशासनिक ढांचे एवं कार्यपद्धति में बदलाव को मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार डॉ. हसमुख अढिया की अध्यक्षता में गठित गुजरात प्रशासनिक सुधार आयोग (जीएआरसी) ने गुरुवार को अपनी चौथी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी। इसमें 9 सिफारिशें की गई हैं। इससे पहले सौंपी जा चुकीं तीन रिपोर्ट में 25 सिफारिशें की गई थीं, जो क्रियान्वित होने की प्रक्रिया में हैं।चौथी रिपोर्ट में आयोग ने राज्य में गांव से तहसील एवं जिले की योजना प्रक्रिया को अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्व आधारित, जनकेन्द्रित बनाने की सिफारिश की है।
बुनियादी कार्यों के लिए जिला योजना का जो बजट वर्षों से स्थिर है, उसमें आयोग ने पांच वर्षों में वार्षिक 10,000 करोड़ रुपए की भारी वृद्धि करने की सिफारिश की है। इससे ज्यादा सड़कें, ज्यादा स्कूल बनाने, स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। ग्रामीण स्तर के जमीन से जुड़े लोगों की शासन में भागीदारी बढ़ेगी।
राज्य में 1973 से जिला स्तरीय योजना के लिए जिला योजना मंडल अस्तित्व में हैं। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि इस जिला योजना मंडल के स्थान पर जिला स्तरीय तमाम योजनाओं की मंजूरी अब से जिला योजना समिति द्वारा दी जाए। इसमें जिला स्तर पर निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्राथमिकता देकर पंचायत स्तर को अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा। समिति में जिले के प्रभारी मंत्री अध्यक्ष बने रहेंगे। जिला स्तर पर योजनाएं निर्धारित करने का अधिकार जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों के हाथ में आएगा।
विभिन्न योजनाओं के कार्यों को तय करने से लेकर प्रशासनिक मंजूरी, टेंडरिंग, वर्क ऑर्डर जारी करने के लिए आयोग द्वारा एक फिक्स कैलेंडर की सिफारिश की गई है। कैलेंडर के तहत आगामी वर्ष की योजना प्रक्रिया जारी वर्ष के जून-जुलाई माह से ग्रामीण स्तर पर शुरू होगी। आगामी वर्ष के अप्रैल माह से वास्तव में कामकाज शुरू हो सके। समय सीमा में कार्य पूरे हो सकें।
आयोग द्वारा तहसील स्तर पर किसी भी कार्य की मंजूरी के लिए एक ही समिति ‘एकीकृत तहसील योजना’ समिति रखने की सिफारिश की गई है। इससे कार्य मंजूर होने में विलंब को रोका जा सकेगा, उलझन कम होगी। अभी अलग अलग समितियां हैं।
हर गांव खुद विलेज डेवलपमेंट प्लान तैयार करेंगे, जिसे ग्रामसभा मंजूर करेगी। तहसील, जिला स्तर पर जिन कार्यों की योजना मंजूर होगी, वे सभी योजनाएं विलेज डेवलपमेंट प्लान से ही चयनित होंगे। इससे ग्रामीणजन स्वयं तय करेंगे कि उनके क्षेत्र में कौन-से कार्य होने चाहिए। वे विकास में भागीदार बनेंगे।