अहमदाबाद

Gujarat: 25 जिलों में कुष्ठ प्रचलन दर प्रति 10,000 में 1 से भी कम

Ahmedabad. गुजरात के 25 जिलों में कुष्ठ प्रचलन दर प्रति 10,000 में 1 से भी कम है। वर्ष 2023-24 से 2025 के तीन साल के दौरान राज्य में 11,640 नए कुष्ठ रोगियों की पहचान सुनिश्चित करते हुए उनका उपचार शुरू किया है। 30 जनवरी कुष्ठ रोग दिवस पर गुजरात सरकार की ओर से यह जानकारी […]

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Ahmedabad. गुजरात के 25 जिलों में कुष्ठ प्रचलन दर प्रति 10,000 में 1 से भी कम है। वर्ष 2023-24 से 2025 के तीन साल के दौरान राज्य में 11,640 नए कुष्ठ रोगियों की पहचान सुनिश्चित करते हुए उनका उपचार शुरू किया है। 30 जनवरी कुष्ठ रोग दिवस पर गुजरात सरकार की ओर से यह जानकारी साझा की गई।

इसमें बताया कि दिसंबर 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के तहत गुजरात ने कुष्ठ रोग उन्मूलन की दिशा में प्रभावशाली प्रगति की है। राज्य के 25 जिलों में कुष्ठ रोग की प्रचलन दर प्रति 10,000 जनसंख्या पर 1 से नीचे बनाए रखने में सफलता पाई है। स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2023-24 से दिसंबर 2025 तक सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं और विशेष पहचान अभियानों के माध्यम से कुल 11,640 नए कुष्ठ रोगियों की पहचान की गई है। उन्हें निःशुल्क बहु-औषधीय उपचार दिया जा रहा है।

साल-दर-साल आ रही कमी

वर्ष-वार आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2023-24 में 4,323 रोगी चिन्हित किए गए, जिनमें 238 बाल रोगी थे। वर्ष 2024-25 में 4,033 नए रोगी सामने आए, जिनमें 171 बच्चे शामिल थे, जबकि वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक नए 3,288 कुष्ठ रोगी चिन्हित किए गए हैं , जिनमें 126 बाल रोगी हैं।कुष्ठ रोग के समय पर निदान और प्रभावी नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने लेप्रसी केस डिटेक्शन कैंपेन को मिशन मोड में शुरू किया है। वर्ष 2023-24 से दिसंबर 2025 तक इस अभियान के तहत 3,900 से ज्यादा कुष्ठ के छिपे मामलों की पहचान की गई। रोगियों को प्रारंभिक अवस्था में ही उपचार से जोड़ा, जिससे विकृति और अपंगता की आशंका में कमी आई है।

उपचार से आगे गरिमा और पुनर्वास का मॉडल

गुजरात सरकार ने कुष्ठ रोग उन्मूलन के प्रयासों को केवल उपचार तक सीमित न रखते हुए गरिमा और पुनर्वास का एक व्यापक व मानवीय मॉडल अपनाया है। इसके तहत जरूरतमंद रोगियों के पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन की पुनर्स्थापना के उद्देश्य से वर्ष 2023-24 में 25, वर्ष 2024-25 में 30 तथा वर्ष 2025-26 में दिसंबर तक 26 यानी कुल 81 रीकन्स्ट्रक्टिव सर्जरी की गईं हैं। पैरों में संवेदनहीनता से पीड़ित कुष्ठ रोगियों की सुरक्षा, गतिशीलता और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए 26,120 से ज्यादा माइक्रो सेलुलर रबर शूज़ निःशुल्क वितरित किए हैं। जबकि घावों की समय पर देखभाल और संक्रमण की रोकथाम के लिए 8,300 अल्सर किट उपलब्ध कराई गईं।

घबराएं नहीं, समय पर पहचानें, उपचार कराएंकुष्ठ रोग एक संक्रामक लेकिन पूर्णतः इलाज योग्य बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम लेप्रेसी जीवाणु से होती है। मुख्य रूप से त्वचा व तंत्रिकाओं को प्रभावित करती है। यह किसी भी आयु के स्त्री-पुरुष को हो सकती है, लेकिन समय पर पहचान और नियमित बहु-औषधीय उपचार (एमडीटी) से न केवल इसका प्रसार रोका जा सकता है, बल्कि विकृति और अपंगता से भी बचाव संभव है। शरीर पर हल्के रंग या लालिमा युक्त संवेदनाहीन धब्बे, तंत्रिकाओं का मोटा होना और स्पर्श करने पर दर्द का अनुभव न होना इसके प्रमुख लक्षण हैं। सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर इसका निःशुल्क उपचार होता है।

Published on:
30 Jan 2026 10:12 pm
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