अहमदाबाद

गुजरात में अब दिन-रात 24 घंटे खुली रखी जा सकेंगी दुकानें

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल विधानसभा में बहुमत से पारित, दूसरे राज्यों में पंजीकृत चिकित्सकों के लिए गुजरात में पंजीकरण प्रक्रिया होगी आसान
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एआइ फोटो।

Gandhinagar. गुजरात में अब दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान 24 घंटे खुले रखे जा सकेंगे। इसके लिए गुजरात शॉप्स एंड एस्टाब्लिशमेंट्स एक्ट, 2019 में संशोधन किया गया है। हालांकि कर्मचारियों के लिए काम के घंटे, आराम का अंतराल और रोजगार की शर्तों से जुड़े लागू कानूनों का पालन करना अनिवार्य होगा। इन महत्वपूर्ण प्रावधानों के साथ ‘गुजरात ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक- 2026’ को गुजरात विधानसभा में शुक्रवार को बहुमत से पारित कर दिया गया।

उद्योग राज्य मंत्री डॉ. जयराम गामित ने विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य राज्य में उद्योग और कारोबार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल, तेज, पारदर्शी और उद्योग अनुकूल बनाना है। इस बिल के माध्यम से राज्य के पांच अलग-अलग कानूनों की 12 धाराओं में संशोधन किया गया है। इससे नियामकीय प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ विधानसभा का समय भी बचाया गया है।

नए प्रावधान के तहत राज्य के महानगर पालिका क्षेत्र, नेशनल हाइवे, रेलवे प्लेटफॉर्म, राज्य पथ परिवहन निगम के बस स्टेशन परिसर, हॉस्पिटल परिसर और पेट्रोल पंप पर दुकानों और प्रतिष्ठानों को सातों दिन 24 घंटे खुला रखा जा सकेगा। हालांकि नगर पालिका, राज्य के राजमार्गों पर मौजूद दुकानों को मध्यरात्रि बाद दो बजे से लेकर छह बजे तक की अवधि को छोड़ अन्य समय तक खुला रखा जा सकेगा। जिलों में और छोटे रास्तों पर भी देर रात 11 बजे तक दुकानें खुली रखी जा सकेंगीं। 11 से सुबह छह बजे तक उन्हें बंद रखना होगा। पंजीकरण कराए बिना दुकान चलाने की स्थिति में 10 हजार रुपए का दंड वसूला जाएगा। इस राशि में पंजीकरण शुल्क को भी शामिल माना जाएगा।

बाहरी राज्य के चिकित्सकों के लिए आसान होगा पंजीकरण

विधेयक में गुजरात मेडिकल काउंसिल एक्ट, 1967 में संशोधन का प्रावधान किया है, उसके तहत दूसरे राज्य में पंजीकृत चिकित्सकों के लिए गुजरात में पंजीकरण प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान होगी। सेल्फ डिक्लरेशन के आधार पर पंजीकरण की सुविधा मिलेगी, जिससे चिकित्सा सेवाओं और चिकित्सकों की पेशेवर मोबिलिटी को गति मिलेगी।विधेयक में गुजरात फायर प्रिवेंशन एंड लाइफ सेफ्टी मेजर्स एक्ट, 2013 में अग्नि सुरक्षा के मानकों को जोखिम और काम के स्वरूप के आधार पर बनाया गया है। स्थानीय परिस्थितियों और भवन के प्रकार के अनुसार नियमों को लागू करने से अनुपालन लागत कम होने की उम्मीद है।

एमएसएमई के लिए ‘राइट टू बिजनेस’ व्यवस्था मजबूत

गुजरात एमएसएमई फैसिलिटेशन एक्ट, 2019 के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए ‘राइट टू बिजनेस’ व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। सहकारिता, बिजली, जीआइडीसी और सिंचाई सहित अतिरिक्त 8 राज्य कानूनों को फैसिलिटेशन फ्रेमवर्क के अनुरूप किया गया है।

सरकारी सेवाओं में ऑटो-अपीयर और ऑटो-एस्केलेशन

गुजरात राइट ऑफ सिटिजंस टू पब्लिक सर्विसेज एक्ट, 2013 में भी बदलाव किया गया है। तय समय सीमा में सरकारी सेवा या शिकायत का निपटारा नहीं होने पर मामला अपने आप उच्च अधिकारी के पास पहुंच जाएगा। इसके लिए तकनीक आधारित ‘ऑटो-अपीयर’ और ‘ऑटो-एस्केलेशन’ मैकेनिज्म लागू किया जाएगा।

नागरिकों, उद्योगों को होगी सुविधा

मंत्री ने कहा कि इन सुधारों से नागरिकों और उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम होगा। सेल्फ डिक्लरेशन, सेल्फ सर्टिफिकेशन और तकनीक आधारित व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी। गुजरात औद्योगिक नीति-2026, हाल में आयोजित चारों क्षेत्रीय वाइब्रेंट गुजरात समिट और आगामी जनवरी में होने वाली 11वीं वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट-2027 की पृष्ठभूमि में ये कानूनी सुधार निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

Updated on:
11 Sept 2026 10:04 pm
Published on:
11 Sept 2026 10:04 pm