
Ahmedabad. गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (गीर) फाउंडेशन के शोधकर्ताओं ने ‘रुंजिया रिपेंस’ की एक नई सफेद फूलों वाली किस्म खोजी है। इससे गुजरात के पादप जगत में एक नया पौधा जुड़ा है।
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने शुक्रवार को बताया कि नए पहचाने गए पौधे की किस्म का नाम रुंजिया रिपेंस वैरायटी अल्बा रखा गया है, जिसमें ‘अल्बा’ नाम पौधे के सफेद रंग के फूलों का संदर्भ देता है। इस पौधे की नई किस्म छोटाउदेपुर जिले में नर्मदा कैनाल कमांड एरिया में जैव-विविधता के अध्ययन के दौरान दिखाई दी। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन मध्य गुजरात और दक्षिण गुजरात के कुछ हिस्सों में नर्मदा कैनाल सिस्टम का पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र (जैव विविधता, मिट्टी और पानी की गुणवत्ता) पर प्रभाव नामक प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में किया गया था।
वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि इस प्रकार के शोध के कारण हमें अपने राज्य में मौजूद जैव-विविधता की समृद्धि के बारे में पता चलता है और इससे भविष्य में इसके संरक्षण के लिए नई दिशा मिलती है। फाउंडेशन के निदेशक बी.पी. पति ने कहा कि हमारे शोधकर्ताओं ने जैव-विविधता के अध्ययन के दौरान छोटाउदेपुर जिले से इस पौधे की नई किस्म के तीन परिपक्व पौधों का विवरण दर्ज किया। इस पौधे का नमूना एकत्रित करके और सूखाकर गीर फाउंडेशन हर्बेरियम (जीईईआरएफ) में जमा किया है।
गुजरात के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) डॉ. जयपाल सिंह ने कहा कि रुंजिया रिपेंस वैरायटी अल्बा की पहचान गुजरात की जैविक समृद्धि को बढ़ाती है और नर्मदा कैनाल सिस्टम से जुड़े क्षेत्रों में निरंतर इकोलॉजिकल सर्वेक्षणों के महत्व को उजागर करती है। इस शोध टीम में गीर फाउंडेशन के डॉ. राजकुमार यादव, नमन नायक, विनेश गामित, उपनिदेशक अमित कुमार नायक और निदेशक पति शामिल हैं।
शोध से जुड़े डॉ. यादव ने कहा कि पौधे की यह नई किस्म आम तौर पर पाए जाने वाले रुंजिया रिपेंस से अलग है, जिसमें नीले और बैंगनी रंग के फूल होते हैं। नई किस्म में बिल्कुल सफेद कोरोला (फूल की पंखुड़ियां), मध्यम आकार के फ्लावर स्पाइक्स (पुष्प दंड ) तथा हरे और सफेद पॉइंटेड टिप्स वाले छोटे ब्रेक्ट्स (पत्तीनुमा संरचना) होते हैं। इस शोध को फॉरेस्ट्री के सबसे पुराने अंतरराष्ट्रीय जर्नल इंडियन फॉरेस्टर में प्रकाशन के लिए स्वीकार कर लिया है। पौधे में फूल आने का समय फरवरी से अप्रेल तक दर्ज किया है। मई से जून तक इसमें फल आते हैं। रुंजिया रिपेंस में फूल आने की समय अगस्त से जनवरी तक दर्ज किया गया है।
फाउंडेशन के उप निदेशक नायक ने कहा कि रुंजिया रिपेंस के मौजूदा नमूनों के साथ विस्तृत मॉर्फोलॉजिकल परीक्षण और तुलना करने के बाद पौधे की पहचान एक नई किस्म के रूप में की गई है।