अहमदाबाद

Gujarat: अब गांव में ही लगेगी नारी अदालत, सुनी जाएगी महिलाओं की शिकायत

-राज्य में पहली बार ग्राम पंचायत स्तर पर पहल, पायलट प्रोजेक्ट के तहत 10 ग्राम पंचायतों में महिला सरपंच संभालेंगी नेतृत्व, जिला-तहसील की 270 नारी अदालतों में 45 हजार में से 44,800 मामलों का हुआ है निपटारा
2 min read
nari adalat
अरवल्ली जिले की धनसुरा तहसील की नारी अदालत।

Ahmedabad. महिलाओं को अब अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला या तहसील स्तर तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। गुजरात सरकार ने ‘नारी को न्याय’ दृष्टिकोण के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर नारी अदालत शुरू करने का निर्णय लिया है। भारत सरकार की मिशन शक्ति योजना के दिशा-निर्देशों के तहत यह पहल फिलहाल राज्य में प्रायोगिक तौर पर की गई है। पहले चरण में 10 आदिवासी बहुल जिलों की 10 ग्राम पंचायतों का इसके लिए चयन किया है। खास बात यह है कि इन सभी पंचायतों में नारी अदालत का नेतृत्व महिला सरपंच करेंगी।

इस पहल का उद्देश्य गांव की महिलाओं की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर सुनना और समाधान की दिशा में प्रयास करना है। गुजरात राज्य महिला आयोग के प्रस्ताव के बाद सरकार ने इन 10 ग्राम पंचायतों का चयन किया है।

जिला-तहसील की सफलता के बाद गांव की बारी

गुजरात में वर्ष 2012-13 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिला और तहसील स्तर पर नारी अदालत की शुरुआत कराई थी। अभी राज्य में जिला-तहसील स्तर पर 270 से अधिक नारी अदालतें कार्यरत हैं। इनमें अब तक करीब 45 हजार मामले सामने आए, जिनमें से 44,800 यानी 99 प्रतिशत से अधिक मामलों का निपटारा या समझौता कराया जा चुका है। इसी सफलता के बाद अब इस व्यवस्था को गांव तक ले जाने का प्रयोग शुरू किया जा रहा है।

इन 10 पंचायतों में शुरू होगी नारी अदालत

नारी अदालत के लिए चयनित पंचायतों में नर्मदा जिले की गरुडेश्वर और चीकदा, दाहोद की सिंगवड, लीमड़ी और कालिया, महीसागर की कोठंबा, छोटा उदेपुर की कदवाल, वाव-थराद की राधानेसड़ा, अरवल्ली की शामळपुर और बनासकांठा की जलोदा पंचायत शामिल हैं। इन सभी पंचायतों में महिला सरपंच हैं। गरुडेश्वर में सरोज वसावा, चीकदा में लता वसावा, सिंगवड में लिखी वोणिया, लीमड़ी में शीला मोरी, कालिया में पुष्पा मछार, कोठंबा में नीता पटेल, कदवाल में उजली राठवा, राधानेसड़ा में लक्ष्मी कोळी, शामळपुर में संगीता पटेल और जलोदा में गलबीचौधरी सरपंच हैं। ऐसे में महिला सरपंच की अगुवाई में नारी अदालत महिलाओं की समस्या को और भी गंभीरता से सुनेगी और समझेगी। पहल में महिलाओं से जुड़ी समस्याओं को सुनने के लिए स्थानीय स्तर पर मंच उपलब्ध कराने का प्रयास है। महिलाओं की समस्याओं के समाधान की व्यवस्था, स्थानीय स्वशासन संस्था पंचायत, दोनों में महिला नेतृत्व एक ही मंच पर आएगा।

Updated on:
22 Sept 2026 10:52 pm
Published on:
22 Sept 2026 10:52 pm