
Ahmedabad. ट्रैफिक नियम तोड़ना और उसके लिए भेजे गए ई-चालान की अनदेखी करना अब वाहन चालकों को पहले से ज्यादा भारी पड़ सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गुजरात पुलिस ने 12 अगस्त से राज्य में नई नेक्स्ट जनरेशन चालान प्रणाली लागू कर दी है। नई व्यवस्था में ई-चालान जारी करने, उसका भुगतान करने और चालान के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाया गया है। खास बात यह है कि चालान जारी होने के 75 दिन के भीतर जुर्माना नहीं भरने पर वाहन से जुड़ी लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन संबंधी सभी सेवाएं परिवहन पोर्टल पर बंद कर दी जाएंगी।
स्टेट ट्रैफिक ब्रांच की पुलिस अधीक्षक वी. साहित्या ने बताया कि ई-चालान जनरेट होने की तारीख से वाहन मालिक के पास 45 दिन का समय रहेगा। इस अवधि में वाहन चालक या तो चालान का भुगतान कर सकता है अथवा चालान गलत जारी होने की परिवहन पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत कर सकता है। आपत्ति दर्ज कराने के लिए वाहन मालिक को परिवहन पोर्टल पर अपना मोबाइल नंबर अपडेट करना होगा। इसके बाद चालान और शिकायत से जुड़े सभी अपडेट उसे सीधे एसएमएस से मिलेंगे। चालान गलत जारी होने के समर्थन में उसे जरूरी दस्तावेजी साक्ष्य भी पोर्टल पर अपलोड करने होंगे।
ऑनलाइन शिकायत मिलने के बाद पुलिस विभाग संबंधित वाहन मालिक की ओर से पेश किए गए दस्तावेज और साक्ष्यों की जांच करेगा। 30 दिन के भीतर शिकायत का निपटारा किया जाएगा। चालान जनरेट होने से लेकर शिकायत के निपटारे तक की पूरी प्रक्रिया अधिकतम 75 दिन में पूरी होगी। यदि जांच में चालान सही पाया जाता है, तो चालक को जुर्माना भरना होगा। 75 दिन की अवधि पूरी होने के बाद भी जुर्माना जमा नहीं करने पर परिवहन पोर्टल पर संबंधित वाहन की लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सभी सेवाएं स्थगित कर दी जाएंगी।
वाहन चालकों की शिकायतों की निष्पक्ष और त्वरित जांच के लिए जिला स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। हर जिले में उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। उनकी देखरेख में पीआइ स्तर के अधिकारी वाहन चालक की ओर से पेश साक्ष्यों की जांच करेंगे। 30 दिन में अंतिम निर्णय करेंगे।
नए बदलावों में एक अहम बदलाव यह भी है कि अब वाहन चालक यदि पुलिस की ओर से शिकायत का निपटारा किए जाने के बाद पुलिस के फैसले से संतुष्ट नहीं है और मामले को कोर्ट में ले जाना चाहता है, तो उसे चालान की राशि का 50 प्रतिशत भुगतान करना होगा। उसके बाद ही वह कोर्ट में अपील कर सकेगा। इससे पहले ऐसा नहीं था।