Gujarat university, GU, Patent, Maleriya, TB, Research, Ahmedabad, IPO,chemistry शोध पर भारतीय पेटेन्ट ऑफिस ने दिया पेटेन्ट, प्री-क्लीनिकल रिसर्च के परिणाम से असरदार दवाई की बंधी आस
अहमदाबाद. गुजरात विश्वविद्यालय (जीयू) के रसायनशास्त्र विभाग के प्राध्यापक प्रो.हितेश पटेल एवं उनकी टीम ने एक ऐसा रसायन तैयार किया है, जो न सिर्फ मलेरिया बल्कि टीबी के उपचार में भी कारगर है।
जीयू प्राध्यापकों की इस शोध को भारतीय पेटेन्ट ऑफिस की ओर से २६ सितंबर को पेटेन्ट भी प्रदान किया गया है। अब इस शोध के आधार पर न सिर्फ मलेरिया बल्कि टीबी की मौजूदा समय में उपलब्ध दवाई से ज्यादा असरदार दवाई तैयार करने में मदद मिलेगी।
इस रसायन को तैयार करने वाली टीम के मुखिया प्रो.हितेश पटेल बताते हैं कि डॉ.मनोज भोई, डॉ.मयूरी बोरड, डॉ.एडविन पीठावाला और डॉ.धनजी राजाणी की मदद से उन्होंने दो सालों की मेहनत के बाद 'ड्रायहाइड्रोस्पायरो ' नाम का रसायन तैयार किया है। विभिन्न रसायनों के मिश्रण से तैयार किया गया ये रसायन न सिर्फ मच्छर जनति रोग मलेरिया के उपचार में कारगर है बल्कि टीबी की रोकथाम और उपचार में भी असरदार है। विकसित रसायन इन दोनों बीमारियों की मौजूदा दवाईयों से भी ज्यादा असरदार है।
प्रो. हितेश पटेल बताते हैं कि पहले कंप्यूटर के जरिए अणुओं की डिजाइन बनाई फिर लैब में विभिन्न प्रकार के मिश्रण से इस रसायन को तैयार किया। उसके बाद इसके प्री-क्लीनिकल परीक्षण, टॉक्सिकल परीक्षण में इसके प्रभावी परिणाम मिले, जिसके तहत विकसित किया रसायन मलेरिया और टीबी दोनों ही के जीवाणुओं को बढऩे से रोकने, इन्हें मारने और इन रोगों के उपचार में काफी असरदार पाया गया। इतना ही नहीं ये शरीर के अन्य किसी हिस्से को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है। इसमें सूरत की माइक्रो केयर लैब का भी सहयोग रहा। इस रसायन को विकसित करने के बाद उन्होंने इसका पेटेन्ट लेने के लिए वर्ष २०१६ में आवेदन किया था। जिसे भारतीय पेटेन्ट ऑफिस की ओर से परखने के बाद २६ सितंबर २०१९ को पेटेन्ट प्रदान किया है।
तीन माह में दूसरा पेटेन्ट
प्रो.हितेश पटेल एवं उनकी टीम के नाम यह दूसरा पेटेन्ट हैं। इससे पहले सितंबर-१९ में उन्हें टीबी के जीवाणु को सरलता से पहचानने वाली डाई (रसायन) बनाने पर पेटेन्ट मिल चुका है। तीन माह में यह दूसरा पेटेन्ट है। टीम ने छह पेटेन्ट फाइल किए हैं। सात और फाइल करने की तैयारी है।