अहमदाबाद

आइआइटी गांधीनगर का अध्ययन- हर्बल सिगरेट भी तंबाकू की सिगरेट जितनी ही हानिकारक

-आइआइटी गांधीनगर ने यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉइस के साथ किया अध्ययन, जर्नल ऑफ हेजार्डस मटीरियल्स में प्रकाशित हुआ अध्ययन
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Herbal Cigrate
प्रतीकात्मक फोटो।

Ahmedabad. हर्बल उत्पाद है, तो नुकसानदेह नहीं है, ऐसा मानकर यदि आप भी हर्बल सिगरेट का सेवन करते हैं, तो आपको चेतने की जरूरत है।

ऐसा इसलिए है, क्योंकि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) गांधीनगर और अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉइस अर्बाना-शेम्पेइन (यूआइयूसी) के एक संयुक्त अध्ययन में खुलासा हुआ है कि हर्बल सिगरेट भी तम्बाकू वाली सिगरेट जितनी ही नुकसानदेह है। इससे भी धुआं पैदा होता है, जो तम्बाकू की सिगरेट के धुएं जितना ही नुकसानदेह है। कई मामलों में तम्बाकू से भी ज्यादा नुकसान करने वाला है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ हेजार्डस मटीरियल्स में प्रकाशित हुआ है।

अध्ययन में भारत में बिकने वाले दो तम्बाकू ब्रांड और तुलसी, लौंग, दालचीनी, पुदीना, ग्रीन टी, वाटर लिली और कैमोमाइल जैसे मिश्रण वाली चार लोकप्रिय हर्बल किस्मों से तुलना की गई। इसमें दो हर्बल ब्रांड्स ने रेपर के रूप में टीमरू (एबनी) के पत्तों का उपयोग किया था। यह भारत में सबसे ज्यादा उपयोग में लिए जाने वाले धूम्रपान उत्पाद यानी बीड़ी में उपयोग में लिए वाले पत्ते के समान है।

अध्ययन में पाया कि हर्बल सिगरेट के हुएं में 500 नैनोमीटर से छोटे कण तंबाकू धुएं की तुलना में लगभग 20% अधिक पाए गए, जो हृदय और श्वसन रोगों से जुड़े हैं। हर्बल सिगरेट के धुएं में ऑक्सिडेटिव पोटेंशियल (ओपी) तंबाकू सिगरेट से कहीं अधिक पाया गया। विशेष रूप से टीमरू के पत्ते में लिपटे वैरिएंट कागज में बं धे संस्करण से अंदाजित 49 फीसदी अधिक ऑक्सीडेटिव पोटेंशियल दर्शाती है।

रासायनिक विश्लेषण में जानने को मिला कि एक हर्बल सिगरेट जो तुलसी से भरी थी, उसमें सीसा की सांद्रता सबसे ज्यादा थी, भले ही उसे स्वस्थ जीवनशैली के लिए 100 फीसदी कुदरी फिलर के साथ केमिकल मुक्त के रूप में बाजार में क्यों न प्रचारित किया जा रहा हो।

आइआइटी गांधीनगर के सिविल इंजीनियरिंग एवं केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक प्रो. समीर पटेल ने कहा कि तंबाकू-मुक्त का मतलब जोखिम-मुक्त नहीं है। हर्बल सिगरेट का उत्सर्जन लगभग हर पैमाने पर तंबाकू जितना ही या उससे अधिक हानिकारक है। यह अध्ययन इसको लेकर मौजूदा मान्यताओं को चुनौती देता है।

यूआइयूसी के सिविल एवं पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग के प्राध्यापक व शोध के सहयोगी प्रो. विशाल वर्मा ने कहा कि कई उपभोक्ता निकोटिन-मुक्त उत्पादों को कम नुकसान से जोड़ते हैं, लेकिन शोध में पाया कि यह धारणा गलत है।

देश में ऐसे उत्पादों को लेकर नियमन की कमी

भारत का सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम (2003) तंबाकू उत्पादों को नियंत्रित करता है, लेकिन हर्बल सिगरेट जैसी तंबाकू-मुक्त श्रेणी अक्सर इस दायरे से बाहर रहती है। यही स्थिति कई अन्य देशों में भी है। ज्ञात हो कि 31 मई को मनाए जाने वाले विश्व तंबाकू निषेध दिवस की थीम अपील को आकर्षक मुखौटा उतारना: निकोटीन और तम्बाकू की लत का सामना करना से यह अध्ययन पूरी तरह मेल खाता है।

Updated on:
29 May 2026 10:05 pm
Published on:
29 May 2026 10:05 pm