
ahmedabad: अहमदाबाद की सिविल मेडिसिटी स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजीज एंड रिसर्च सेंटर (आइकेडीआरसी) में पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि 45 बहनों ने अपने भाई-बहनों को किडनी दान कर रिश्ते का फर्ज निभाया।
इनमें 41 बहनों ने भाइयों और चार ने बहनों को किडनी देकर उन्हें नया जीवन दिया।भाइयों को किडनी देने वाली अधिकांश बहनों की उम्र 31 से 60 वर्ष के बीच रही। यानी रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने वाली बहनों ने जरूरत पड़ने पर अपने शरीर का एक हिस्सा देकर भाई को जीवन का सबसे अनमोल उपहार दिया। रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर बंधने वाला राखी का धागा रिश्ते की सुरक्षा का प्रतीक है, लेकिन इन बहनों ने उस रिश्ते को जीवन देने की मिसाल में बदल दिया। जहां भाई की रक्षा का संकल्प लिया जाता है, वहीं इन बहनों ने अपनी किडनी देकर भाइयों को जिंदगी का ऐसा उपहार दिया, जिसकी कोई कीमत नहीं।
बहन की किडनी से जीवनदान पाने वाले एक भाई कहते हैं कि उनके पास अपनी बहन को धन्यवाद देने के लिए शब्द नहीं हैं। आमतौर पर रक्षाबंधन पर भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं, लेकिन बहन ने किडनी देकर उन्हें नए जीवन का उपहार दिया है। यह एक मामला नहीं है। आइकेडीआरसी के आंकड़े बताते हैं कि भाई-बहन के रिश्ते में किडनी दान के मामले में बहनें भाइयों से कहीं आगे हैं।
संस्थान के निदेशक डॉ. प्रांजल मोदी के अनुसार पिछले पांच वर्षों में 27 भाइयों ने भी अपने भाई-बहनों को किडनी दान की। इनमें छह भाइयों ने बहनों और 21 ने भाइयों को किडनी दी। इस तरह भाई-बहन के बीच किडनी दान के कुल 72 मामलों में 45 महिला दाता और 27 पुरुष दाता रहे।करुणा, त्याग और दृढ़ संकल्प जैसे गुण महिलाओं को अंगदान के लिए आगे आने के लिए प्रेरित करते हैं। मां हो या बहन, महिलाएं किडनी दान में अक्सर आगे रहती हैं। किसी व्यक्ति को नया जीवन देने से बड़ा कोई उपहार नहीं हो सकता।
आइकेडीआरसी के आंकड़ों में महिलाओं के इस त्याग की बड़ी तस्वीर भी सामने आती है। यहां कुल किडनी प्रत्यारोपणों में 75 फीसदी से अधिक मामलों में किडनी महिला दाताओं ने दी है। महिलाओं ने केवल भाई-बहन ही नहीं, बल्कि पति, बेटे, पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को भी किडनी दान की है।