सौभाग्यशाली को प्राप्त होती है दीक्षा : आचार्य महाश्रमण, 10 दीक्षार्थी बहनें, 7 दीक्षार्थी भाई संसार के पथ को छोड़ वैराग्य पथ पर अग्रसर हुए कोबा के प्रेक्षा विश्व भारती परिसर में आयोजन गांधीनगर. जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण ने बुधवार को कोबा के प्रेक्षा विश्व भारती परिसर में ऐतिहासिक दीक्षा समारोह में […]
गांधीनगर. जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण ने बुधवार को कोबा के प्रेक्षा विश्व भारती परिसर में ऐतिहासिक दीक्षा समारोह में 17 मुमुक्षुओं को दीक्षा प्रदान की। इन दीक्षार्थियों के संयम जीवन स्वीकार करने के दौरान हजारों श्रद्धालु साक्षी बने।
अहमदाबाद में यह पहला प्रसंग था जब जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य की ओर से एक साथ मुनि दीक्षा, साध्वी दीक्षा और समणी दीक्षा के तहत 17 दीक्षा प्रदान की गई। इस दौरान 10 दीक्षार्थी बहनें एवं 7 दीक्षार्थी भाई संसार के पथ को छोड़ वैराग्य पथ पर अग्रसर हुए।
दीक्षा समारोह की शुरुआत में मुमुक्षु रुचिका, मुमुक्षु भावना ने दीक्षार्थियों का परिचय दिया। पारमार्थिक शिक्षण संस्था के अध्यक्ष बजरंग जैन ने आज्ञा पत्र का वाचन किया। दीक्षार्थियों के पिता, भाई आदि परिवारजनों ने आचार्य को आज्ञा पत्र समर्पित किया। इसके बाद आचार्य ने भरी परिषद में दीक्षार्थी भाई बहनों से प्रश्नोत्तर कर परीक्षण किया। उनकी आगम वाणी के उच्चारण के साथ ही मुमुक्षु संन्यास जीवन में प्रविष्ट हुए।
शिष्य की चोटी गुरु के हाथों में रहने की उक्ति को चरितार्थ करते हुए आचार्य ने दीक्षा संस्कार के तहत नव दीक्षित मुनियों का आंशिक केश लूंचन किया। साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभा ने आचार्य की आज्ञा से नवदीक्षित साध्वियों का केश लूंचन किया। इसके बाद नूतन दीक्षार्थियों को जैन साधु की पहचान धर्मध्वज रजोहरण प्रदान करते हुए आचार्य ने आशीर्वचन दिए।
दीक्षा के बाद नव जीवन प्राप्त करने वालों के आध्यात्मिक नामकरण करते हुए आचार्य ने नवदीक्षितों को नाम प्रदान किए।
मुमुक्षु विशाल परीख बने मुनि विशाल कुमार
मुमुक्षु जिगर मेहता बने मुनि जैनम कुमार
मुमुक्षु कल्प मेहता बने मुनि कल्प कुमार
मुमुक्षु मनोज संकलेचा बने मुनि मर्यादा कुमार
मुमुक्षु प्रीत कोठारी बने मुनि प्रीत कुमार
मुमुक्षु मोहक बेताला बने मुनि मेघ कुमार
मुमुक्षु अर्हम सिंघी बने मुनि आर्ष कुमार
मुमुक्षु भावना बाफना बनीं साध्वी भावनाप्रभा
मुमुक्षु मनीषा डुंगरवाल बनीं साध्वी मंथन प्रभा
मुमुक्षु राजुल खाटेड़ बनीं साध्वी धीर प्रभा
मुमुक्षु कीर्ति बुच्चा बनीं साध्वी कल्याण प्रभा
मुमुक्षु प्रेक्षा कोचर बनीं साध्वी ऋतंभरा प्रभा
मुमुक्षु रश्मि महनोत बनीं साध्वी रहस्य प्रभा
मुमुक्षु वीनू संकलेचा बनीं समणी विज्ञ प्रज्ञा
मुमुक्षु अंजली सिंघवी बनीं समणी अपूर्व प्रज्ञा
मुमुक्षु भाविका नाहटा बनी समणी भावित प्रज्ञा
मुमक्षु साधना बांठिया बनी समणी विनम्र प्रज्ञा।
नव दीक्षार्थियों में अमरीका के शिकागो में जन्मे व पले-पढ़े 16 वर्षीय मुमुक्षु अर्हम भी शामिल रहे। आचार्य से दीक्षा स्वीकार कर संन्यास ग्रहण किया। वर्तमान में कोलकाता में प्रवास करने वाले अर्हम के परिवार के कई सदस्य पूर्व में कई तेरापंथ धर्मसंघ में दीक्षा प्राप्त कर चुके हैं।
अहमदाबाद में अपना प्रथम चातुर्मास कर रहे आचार्य महाश्रमण के सानिध्य में भव्य दीक्षा समारोह में उन्होंने कहा कि सौभाग्यशाली को दीक्षा प्राप्त होती है। सांसारिक सुख क्षणिक सुख होते हैं। भौतिक वस्तुओं से प्राप्त होने वाला सुख स्थाई नहीं होता। मनुष्य के आयुष्य की भी एक सीमा होती है इसलिए आत्म कल्याण की दिशा में व्यक्ति को बढ़ना चाहिए। आध्यात्मिक सुख स्थाई सुख होता है। संयम की संपदा सबसे बड़ी संपदा है, इसके सामने संसार के सभी हीरे जवाहरात भी फीके हैं। समारोह में साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा ने दीक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। दीक्षार्थियों ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति दी। मुनि दिनेश कुमार ने संचालन किया।