
गांधीनगर. गुजरात के वन्यजीव संरक्षण में एक और बड़ी खबर सामने आई है। गिर जंगल से छह दशक पहले विलुप्त हो चुके इंडियन ग्रे हॉर्नबिल (आइजीएच-भारतीय धूसर धनेश) पक्षी को फिर से बसाने की कोशिश रंग लाई है।
इंडियन ग्रे हॉर्नबिल पक्षी को फिर से वर्ष 2021 में अरावली के जंगलों से लाकर गिर में छोड़ा गया था। राज्य सरकार के ‘इंडियन ग्रे हॉर्नबिल री-इंट्रोडक्शन’ नामक इस प्रोजेक्ट के तहत अब इन पक्षियों ने गिर के जंगल को अपना स्थायी बसेरा बना लिया है।
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि वर्ष 2021 में गिर जंगल में इंडियन ग्रे हॉर्नबिल पक्षी को फिर से बसाया गया था। अब ये पक्षी गिर के नए प्राकृतिक आवास के माहौल में ढल चुके हैं, प्रजनन भी कर रहे हैं। यह इस प्रोजेक्ट की सफलता को दर्शाता है। वर्ष 1950 और 1960 के दशक में गिर के जंगल से यह पक्षी गायब हो चुका था। ऐसे में यह बड़ी सफलता है।
वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री प्रवीण माली ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड जर्नल ‘बर्ड्स’ में ‘रीइंट्रोडक्शन ऑफ इंडियन ग्रे हॉर्नबिल्स इन गिर, इंडिया : इनसाइट्स इन टू रेंजिंग, हैबिटेट यूज, नेस्टिंग एंड बिहेवियरल पैटर्न’ शीर्षक से एक शोध पत्र प्रकाशित हुआ है। इस शोध पत्र में गुजरात वन विभाग और उनसे जुड़ी संस्थाओं के द्वारा गिर में इंडियन ग्रे हॉर्नबिल पक्षी को वापस लाने के प्रयासों का पहली बार व्यापक आकलन पेश किया गया है।
वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव विनोद राव ने कहा कि इंडियन ग्रे हॉर्नबिल पक्षी को गिर के जंगल में छोड़ने के बाद पहले वर्ष में एक जोड़े ने सफलतापूर्वक प्रजनन किया, जबकि दूसरे वर्ष में तीन और प्रजनन करने वाले जोड़ों ने घोंसले बनाए।
जूनागढ़ वन सर्कल के वन संरक्षक और इस अध्ययन के सह-लेखक मोहन राम ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत दो चरणों में 40 इंडियन ग्रे हॉर्नबिल को गिर के जंगलों में छोड़ा गया। 11 नर पक्षियों में सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाए गए, जिससे वैज्ञानिक कई वर्षों तक उनकी गतिविधियों, उनके रहने की जगहों और प्रजनन व्यवहार पर नजर रख सके। अध्ययन में विशेषज्ञों को महसूस हुआ कि अब गिर में परिस्थितियां इंडियन ग्रे हॉर्नबिल पक्षी के लिए काफी अनुकूल हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सह चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन डॉ. जयपाल सिंह ने कहा कि ग्रे हॉर्नबिल दशकों पहले गिर से गायब हो गए थे, लेकिन 1965 में गिर वन्यजीव अभयारण्य और 1975 में गिर राष्ट्रीय उद्यान घोषित होने के बाद उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा में हुए सुधारों ने इस प्रजाति को वापस लाने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाई।